डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में तमिलनाडु दक्षिणी राज्यों में सबसे आगे
चेन्नई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र द्वारा प्रायोजित 'समग्र शिक्षा अभियान' (एसएसए) के तहत डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में तमिलनाडु दक्षिणी राज्यों में सबसे आगे रहा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य को सबसे ज्यादा आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम बनाने की मंजूरी मिली है।
हालांकि इस योजना के तहत सबसे ज्यादा वित्तीय मंजूरी मिलने के बावजूद राज्य का आरोप है कि केंद्र से फंड मिलने में देरी के कारण उसकी शिक्षा व्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है।
संसद में पेश की गई जानकारी के आधार पर तमिलनाडु सरकार द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों के लिए मंजूर की गई आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम के मामले में राज्य केंद्र प्रायोजित 'समग्र शिक्षा अभियान' का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है।
आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 और 2025-26 शैक्षणिक वर्षों के बीच तमिलनाडु को 9,432 आईसीटी लैब की मंजूरी मिली, जो सभी दक्षिणी राज्यों में सबसे ज्यादा है।
यह संख्या तेलंगाना की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा है, जो दक्षिणी राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। अकेले 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए, तमिलनाडु को 2,166 आईसीटी लैब की मंजूरी मिली, जबकि तेलंगाना को 1,242 लैब की मंजूरी मिली।
स्मार्ट क्लासरूम शुरू करने में भी राज्य सबसे आगे रहा है। जब से तमिलनाडु के लिए 2024-25 में यह योजना शुरू की गई, तब से राज्य को 8,967 स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी मिली है, जो कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए मंजूर की गई संख्या से लगभग दोगुनी है।
इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और टेक्नोलॉजी-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। तमिलनाडु ने इस कार्यक्रम के तहत सबसे ज्यादा वित्तीय मंजूरी भी हासिल की है।
केंद्र ने 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए राज्य को 167 करोड़ रुपए की मंजूरी दी, जबकि 2021-22 और 2025-26 के बीच कुल मंज़ूरी 655.25 करोड़ रुपए थी। हालांकि, राज्य के अधिकारियों का कहना है कि मंजूर की गई राशि जारी नहीं की गई है, जिससे तमिलनाडु को अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके ये सुविधाएं चलानी पड़ रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और लैब इंस्ट्रक्टर की सैलरी का खर्च उठा रहा है, जो हर साल कई करोड़ रुपए होता है।
तमिलनाडु में समग्र शिक्षा की प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम. आरती ने कहा कि राज्य अपने बजट से ही इस प्रोग्राम के लिए फंड दे रहा है क्योंकि पिछले तीन सालों से केंद्र से मदद नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस देरी से कामकाज में दिक्कतें आ रही हैं, खासकर लैब इंस्ट्रक्टर की सैलरी जैसे लगातार होने वाले खर्चों को पूरा करने में।
राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र ने तमिलनाडु द्वारा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (नेप) को लागू न करने का हवाला देते हुए फंड जारी करने पर रोक लगा दी है।
--आईएएनएस
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