तमिलनाडु: शिक्षकों ने सार्वजनिक परीक्षा केंद्रों पर कैमरे लगाने और कड़ी निगरानी की मांग की
चेन्नई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु में 2026-27 की कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की परीक्षाओं को बेहतर ढंग से आयोजित करने के लिए सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने कई सुझाव दिए हैं। इनमें सार्वजनिक परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना और परीक्षा निरीक्षकों (इनविजिलेटर) की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार करना शामिल है।
शिक्षकों की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग से यह भी आग्रह किया गया है कि परीक्षाओं के बीच के अंतराल को कम किया जाए। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी पुनर्विचार करने को कहा है कि क्या मुख्य परीक्षा निरीक्षकों को परीक्षा शुरू होने के पहले घंटे के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए?
कुछ निजी स्कूलों में बहुत बड़ी संख्या में छात्रों के 'परफेक्ट स्कोर' (100 में से 100 अंक) लाने पर उठे सवालों के बाद ये मांगें सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, एक निजी स्कूल में 2025 में कक्षा 12 के 148 छात्रों में से 100 से अधिक छात्रों ने केमिस्ट्री में 100 में से 100 अंक हासिल किए, जबकि 2026 में किसी भी छात्र को इतने अंक नहीं मिले। कुछ निजी स्कूलों में इस तरह के बड़े अंतर को देखते हुए, विभाग ने 2026 में वहां होने वाली परीक्षाओं की निगरानी के लिए विशेष अधिकारियों (ऑफिसर्स ऑन स्पेशल ड्यूटी) को नियुक्त किया था।
तमिलनाडु हायर सेकेंडरी हेडमास्टर्स एसोसिएशन के राज्य महासचिव आर. श्रीनिवासन ने कहा कि सीसीटीवी निगरानी से छात्रों की सुरक्षा होगी और परीक्षाओं के दौरान जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने उन मामलों का जिक्र किया, जिनमें परीक्षा निरीक्षक के तौर पर काम कर रहे सरकारी शिक्षकों के खिलाफ 'बच्चों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (पॉक्सो एक्ट) के तहत केस दर्ज किए गए थे।
आर. श्रीनिवासन ने बताया कि छात्रों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जबकि शिक्षकों का कहना था कि वे केवल नकल या गलत तरीकों की जांच कर रहे थे। उन्होंने सीबीएसई और कर्नाटक के स्कूल शिक्षा विभाग के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि वहां सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य है, और तमिलनाडु में भी ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए।
हालांकि, सरकारी परीक्षा निदेशालय (डायरेक्टोरेट ऑफ गवर्नमेंट एग्जामिनेशंस) के अधिकारियों ने बताया कि 7,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर कैमरे लगाने में काफी खर्च आएगा, जबकि हर केंद्र में कई हॉल होते हैं। अनुमान के मुताबिक, लगभग 8.5 लाख परीक्षार्थी हैं और हर हॉल में 20 छात्रों को बैठाया जाता है, ऐसे में लगभग 42,000 हॉल में सीसीटीवी कवरेज की जरूरत होगी।
इसके विकल्प के तौर पर, श्रीनिवासन ने सुझाव दिया कि परीक्षाओं के दौरान कुछ चुने हुए केंद्रों पर 'प्लग-एंड-प्ले' कैमरे लगाए जा सकते हैं। शिक्षकों का यह भी तर्क है कि परीक्षाओं के बीच लंबा अंतराल होने से छात्रों का ध्यान (एकाग्रता) भटक जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि निजी स्कूलों में परीक्षा ड्यूटी के लिए सरकारी शिक्षकों को तैनात करने से निचली कक्षाओं की नियमित पढ़ाई भी बाधित होती है। एक और चिंता उस प्रावधान को लेकर है, जो मुख्य पर्यवेक्षकों (चीफ इनविजिलेटर) को परीक्षा शुरू होने के बाद एक घंटे तक फोन का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है, ताकि वे उपस्थिति और अन्य जानकारी दे सकें। शिक्षकों ने इसके दुरुपयोग की आशंका जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
परीक्षा कर्मचारियों की नियुक्ति कंप्यूटर के जरिए रैंडम तरीके से करने की मांग करते हुए शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कभी-कभी स्थानीय प्रभाव के कारण पोस्टिंग तय होती है, जिससे कुछ खास स्कूलों में ऐसे पर्यवेक्षक तैनात कर दिए जाते हैं जो सख्ती नहीं बरतते। उन्होंने कहा कि रैंडम तरीके से नियुक्ति करने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और पूरे राज्य के सभी केंद्रों पर एक जैसी निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी।
--आईएएनएस
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