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अगले वैश्विक निवेश चक्र की कमान संभालेंगे 'सनराइज सेक्टर्स', भारत के लिए बड़ा अवसर: एसबीआई चेयरमैन

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने बुधवार को कहा कि वैश्विक निवेश का अगला बड़ा दौर नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे सनराइज सेक्टर्स से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन को गति देने में भारत का बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
 

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने बुधवार को कहा कि वैश्विक निवेश का अगला बड़ा दौर नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे सनराइज सेक्टर्स से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन को गति देने में भारत का बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सेट्टी ने कहा कि आने वाले वर्षों में वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा इन उभरते उद्योगों की ओर प्रवाहित होने की संभावना है, जिससे आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और नए रोजगार अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है। देश के पास कुशल कार्यबल, मजबूत उद्यमशीलता इकोसिस्टम और तेजी से विकसित हो रही तकनीकी क्षमताएं मौजूद हैं, जो उसे वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद कर सकती हैं।

एसबीआई चेयरमैन के अनुसार, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा या नवाचार की कमी नहीं है, बल्कि इन क्षमताओं को व्यावसायिक रूप से सफल उद्यमों, उन्नत तकनीकों, मजबूत विनिर्माण आधार और वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा में बदलने की है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए वास्तविक अवसर ऐसी कंपनियां खड़ी करने में है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और देश को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में नेतृत्व दिला सकें।

सेट्टी ने उभरती अर्थव्यवस्था में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकियों और नवाचार-आधारित विकास की ओर बढ़ेगी, वित्तीय क्षेत्र को भी अपने वित्तपोषण मॉडल और ढांचे में बदलाव करना होगा।

उन्होंने कहा कि पूंजी-गहन और तकनीक-आधारित उद्योगों की जरूरतें पारंपरिक क्षेत्रों से अलग होती हैं। इसलिए बैंकिंग प्रणाली को ऐसे क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और विशेष वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने होंगे।

एसबीआई प्रमुख ने जोर देकर कहा कि बैंक नवाचार, निवेश और विस्तार को समर्थन देने वाले वित्तीय ढांचे के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि भारत को इन सनराइज सेक्टर्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल करनी है, तो वित्तीय संस्थानों को भी उसी गति से विकसित होना होगा।

उन्होंने आगे बताया कि आर्थिक विकास का लक्ष्य केवल उच्च वृद्धि दर हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उस वृद्धि को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और उद्योगों में नेतृत्व में बदलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सेट्टी ने कहा, "भारत को विश्वस्तरीय कंपनियों के निर्माण की अपनी क्षमता को और मजबूत करना होगा, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें।"

--आईएएनएस

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