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जम्मू-कश्मीर में प्रोजेक्ट की मंजूरी होगी आसान, अधिकारियों को मिले ज्यादा वित्तीय अधिकार

श्रीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने और फैसले लेने की शक्तियों के विकेंद्रीकरण की अपनी नीति के तहत, अलग-अलग कामों के लिए प्रशासनिक मंजूरी, तकनीकी मंजूरी और कॉन्ट्रैक्ट देने से जुड़ी वित्तीय शक्तियों के बंटवारे में काफी बदलाव किए हैं।
 

श्रीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने और फैसले लेने की शक्तियों के विकेंद्रीकरण की अपनी नीति के तहत, अलग-अलग कामों के लिए प्रशासनिक मंजूरी, तकनीकी मंजूरी और कॉन्ट्रैक्ट देने से जुड़ी वित्तीय शक्तियों के बंटवारे में काफी बदलाव किए हैं।

जम्मू-कश्मीर फाइनेंस डिपार्टमेंट ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 67 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मौजूदा नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 9 जनवरी 2020 को जारी पिछली अधिसूचना के संबंधित नियमों की जगह लेंगे।

नए नियमों के तहत प्रशासनिक विभाग 30 करोड़ रुपए तक के कामों को मंजूरी दे सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग के संबंधित अधिकारी की सहमति जरूरी होगी।

सरकार ने मूल कामों के विस्तृत अनुमानों के लिए तकनीकी मंजूरी देने की शक्तियों में भी बदलाव किया है, जिसमें विशेष मरम्मत, नवीनीकरण, अतिरिक्त निर्माण, बदलाव और सुधार शामिल हैं, जिनका खर्च रखरखाव के तहत नहीं आता है।

नए नियमों के अनुसार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर को 2 करोड़ रुपए तक, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 75 लाख रुपए तक, असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 10 लाख रुपए तक का अधिकार दिया गया है।

अधिसूचना में यह भी जिक्र है कि 5 लाख रुपए और 20 लाख रुपए से ज्यादा लागत वाले अलग-अलग कामों के प्लान और डिजाइन के लिए, सक्षम अधिकारी की तकनीकी मंजूरी से पहले सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और चीफ इंजीनियर से मंजूरी लेनी होगी। रखरखाव और मरम्मत से जुड़े कामों के लिए सुपरिटेंडिंग इंजीनियर को 7.50 लाख रुपए, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 3.75 लाख रुपए और असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 1 लाख रुपए तक अधिकार दिया गया है।

सरकार ने साथ ही अलग-अलग कामों के लिए कॉन्ट्रैक्ट मंजूर करने और देने की वित्तीय शक्तियों को भी बढ़ाया है। नए नियमों के तहत, नए प्रावधान इस प्रकार हैं, विभागीय कॉन्ट्रैक्ट समिति को 60 करोड़ रुपए तक, चीफ इंजीनियर को 30 करोड़ रुपए तक, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर को 10.50 करोड़ रुपए तक और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 2.25 करोड़ रुपए।

इन नए बदलावों से उम्मीद है कि वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी, प्रशासनिक देरी कम होगी और सरकारी तंत्र के अलग-अलग स्तरों पर फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम