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राहुल गांधी के तंज पर विदेश मंत्रालय ने कहा- इटली के साथ मजबूत संबंध, एक-दूसरे का सम्मान करना होगा

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद सियासी माहौल काफी गर्म हो गया है। इस गहमागहमी के बीच विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत-इटली के मजबूत संबंधों और डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल बनाए रखने पर जोर दिया।
 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद सियासी माहौल काफी गर्म हो गया है। इस गहमागहमी के बीच विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत-इटली के मजबूत संबंधों और डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल बनाए रखने पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में राहुल गांधी के मजाकिया अंदाज को लेकर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, "इटली के साथ हमारे मजबूत संबंध हैं। हाल के सालों में इटली के साथ हमारे संबंध हर तरह से बढ़े और बेहतर हुए हैं। यह जरूरी है कि कूटनीतिक तौर पर हम एक-दूसरे का सम्मान करते हुए और आपसी समझ रखते हुए द्विपक्षीय संबंध मजबूत करें।"

दरअसल, राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ गले मिलकर पीएम मोदी के विदेशी नेताओं से सार्वजनिक तौर पर गले मिलने का मजाक उड़ाया था। इसके साथ ही उन्होंने भारत की विदेश नीति को लेकर भी निशाना साधा था।

इसके बाद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर ऐसी बातें कहीं जिन्हें आलोचकों ने बहुत अशिष्ट और गलत बताते हुए इसकी निंदा की है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस बयान को घटिया बताया है।

आलोचकों ने कहा कि विपक्ष को केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को चुनौती देने का पूरा हक है लेकिन आलोचना तथ्यों, पॉलिसी और नतीजों के आधार पर होनी चाहिए न कि दिखावटी संकेतों पर।

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी बातों से वे विपक्ष के नेता कम और एक विफल स्टैंडअप कॉमेडियन ज्यादा लगते हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर "लॉकर-रूम की बातें और घटिया इशारे" करने का आरोप लगाया और कहा कि देश को नेता विपक्ष से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं है।

इसके अलावा, भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने भी सवाल उठाया कि राजनीतिक बहस कितनी नीचे गिर सकती है? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से असहमति पूरी तरह जायज है लेकिन एक विदेशी महिला नेता को उसमें घसीटना न तो समझदारी है और न ही नेतागिरी।

विश्लेषकों ने कहा, "सकारात्मक विपक्ष का मतलब होना चाहिए कि सरकार को बेरोजगारी, आर्थिक नीतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिप्लोमेसी और गवर्नेंस पर जवाबदेह ठहराया जाए। राहुल गांधी के पास ठीक यही करने के लिए संवैधानिक अधिकार है।"

--आईएएनएस

केके/पीएम