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दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करें: पर्यावरण मंत्रालय

जयपुर, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली और एनसीआर में शामिल चार राज्यों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं।
 

जयपुर, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली और एनसीआर में शामिल चार राज्यों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं।

अलवर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी वायु गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के लिए तैयारियां करने का निर्देश दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, शीत ऋतु में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनसीआर में 1 नवंबर से शीतकालीन कार्य योजना लागू की जाएगी।

इन उपायों में यांत्रिक सड़क सफाई, नियमित जल छिड़काव, 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण और कोयला आधारित तंदूरों तथा पारंपरिक डीजल जनरेटरों पर प्रतिबंध शामिल हैं।

लागू प्रदूषण नियंत्रण दिशानिर्देशों के अनुसार विध्वंस और निर्माण गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लागू होंगे। घोषित उपायों के अनुसार, दिल्ली में बीएस-वीआई उत्सर्जन मानकों को पूरा न करने वाले वाणिज्यिक और निजी पेट्रोल और डीजल वाहनों पर 1 नवंबर से प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

एक नीति के तहत वाहनों को पेट्रोल पंपों से ईंधन प्राप्त करने के लिए वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र होना भी अनिवार्य है।

सीएक्यूएम की श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपाय अलवर सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू होंगे।

मुख्य उपायों में शामिल हैं: खुले में कूड़ा, अपशिष्ट और सूखे पत्ते जलाने पर जुर्माना लगेगा। होटलों और सड़क किनारे के ढाबों में कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों पर भी प्रतिबंध लागू होंगे। डीजल जनरेटरों पर प्रतिबंध: औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को जनरेटर सेटों से संबंधित लागू मानदंडों का पालन करना होगा।

सीएनजी, एलपीजी, और स्वीकृत दोहरे ईंधन प्रणालियों सहित स्वच्छ विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाएगा या जहां निर्दिष्ट हो, जहां अनिवार्य किया जाएगा। नगर निकायों और स्थानीय अधिकारियों को धूल को हवा में फैलने से रोकने के लिए नियमित रूप से यांत्रिक सड़क सफाई और जल छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है। निर्माण और विध्वंस गतिविधियों को प्रदूषण नियंत्रण आवश्यकताओं के अनुसार विनियमित किया जाएगा।

निर्धारित धूल नियंत्रण उपायों, जिनमें जहां आवश्यक हो वहां हरित जाल शामिल हैं, को लागू करने में विफल रहने वाले स्थलों पर प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है।

तापमान गिरने के साथ वायु गुणवत्ता पर दबाव पड़ने की आशंका को देखते हुए आने वाले सप्ताह अलवर और पूरे एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण तैयारियों की प्रभावशीलता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे।

सर्दियों के महीनों के दौरान प्रदूषण को कम करने के लिए निर्धारित उपायों का समय पर कार्यान्वयन और प्रवर्तन आवश्यक होगा।

--आईएएनएस

एमएस/