पश्चिम बंगाल के हर स्कूल में तंबाकू विरोधी अभियान, सीएमओ को सौंपी गई जिम्मेदारी
कोलकाता, 23 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूली छात्रों को तंबाकू की लत से दूर रखने के लिए नई पहल की है। एक सरकारी अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की गई है, जिसे सभी जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों को भेज दिया गया है।
गाइडलाइंस के मुताबिक, हर स्कूल में तंबाकू विरोधी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। अगर कोई छात्र तंबाकू की लत का शिकार पाया जाता है, तो उसे व्यवहार संबंधी काउंसलिंग दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।
नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, हर स्कूल को हर छह महीने में 100 अंकों का स्व-मूल्यांकन करना होगा। जिन स्कूलों को 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक मिलेंगे, उन्हें ही 'तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान' का प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
यह पहल युवाओं पर हाल ही में किए गए एक सर्वे के बाद शुरू की गई है। सर्वे में पता चला कि पश्चिम बंगाल में 13 से 15 साल की उम्र के 8.5 प्रतिशत छात्र सिगरेट या गुटखे के आदी हैं।
स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए हर ब्लॉक में एक विशेष टीम बनाई जाएगी। इस टीम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के मेडिकल अधिकारी, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, परामर्शदाता और ब्लॉक स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल होंगे। ये टीम ब्लॉक के स्कूलों का दौरा करेगी।
जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल सरकार की इस पहल से छात्रों को तंबाकू की लत छोड़ने में मदद मिलेगी। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 'तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान' (टीओएफईआई) कार्यक्रम का उद्देश्य सभी शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाना है। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, तंबाकू विरोधी कानून, 2003 का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
तंबाकू के नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ छात्रों को सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 की भी जानकारी दी जाएगी।
स्कूलों में क्विज़, पोस्टर और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। परामर्शदाताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों और अभिभावकों को तंबाकू के नुकसान के बारे में जागरूक करें। अभिभावक-शिक्षक बैठकों में भी तंबाकू से होने वाले नुकसान पर चर्चा की जाएगी।
हर स्कूल में तंबाकू निगरानी समिति बनाई जाएगी। यह समिति जांच करेगी कि स्कूल के 100 गज के दायरे में कहीं तंबाकू की बिक्री तो नहीं हो रही है। तंबाकू की बिक्री रोकने के लिए स्कूल, अभिभावकों, स्थानीय पंचायतों, युवा संगठनों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 'तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान' का प्रमाणपत्र पाने के लिए स्कूलों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। स्कूल परिसर में ऐसी जगह 'तंबाकू मुक्त क्षेत्र' का बोर्ड लगाना होगा, जो आसानी से दिखाई दे। मुख्य प्रवेश द्वार पर 'तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान' का बैनर भी लगाना होगा। इसके अलावा, स्कूल परिसर में सिगरेट, बीड़ी के टुकड़े, गुटखा या खैनी के खाली पैकेट और थूक के निशान नहीं होने चाहिए।
--आईएएनएस
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