तमिलनाडु : स्टालिन ने 'नान मुधलवन' स्कीम का नाम बदलने की आलोचना की
चेन्नई, 20 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने शनिवार को राज्य सरकार के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें प्रमुख 'नान मुधलवन' स्कीम का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम को कमजोर करने या बंद करने की किसी भी कोशिश से राज्य के युवाओं की तरक्की पर बुरा असर पड़ेगा।
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में कहा कि स्कीम का नाम बदलने या सोशल मीडिया से इसे हटाने से इसकी उपलब्धियां या उन हजारों लाभार्थियों का आभार खत्म नहीं होगा, जिनकी जिंदगी इस स्कीम से बदली है।
उनकी यह टिप्पणी सरकार द्वारा स्कीम का नाम बदलने और कथित तौर पर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों से 'नान मुधलवन' से जुड़ा कंटेंट हटाने के कदम के जवाब में आई है।
स्टालिन ने कहा, "आप 'नान मुधलवन' सोशल मीडिया पेजों का नाम बदल सकते हैं। आप वहां पब्लिश की गई पोस्ट डिलीट कर सकते हैं। लेकिन आप उस स्कीम की उपलब्धियों को नहीं मिटा सकते जिसने हजारों युवाओं को उनके सपने पूरे करने में मदद की।"
डीएमके नेता ने कहा कि यह प्रोग्राम पूरे तमिलनाडु में छात्रों और नौकरी चाहने वालों की उम्मीदों से गहराई से जुड़ गया था और इसके असर को सिर्फ इसके नाम या ब्रांडिंग से नहीं मापा जा सकता।
स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा छात्रों को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा, "पांच साल तक मैंने बार-बार छात्रों से पढ़ाई, पढ़ाई और पढ़ाई करने का आग्रह किया। इसी मकसद से मैंने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट 'नान मुधलवन' शुरू किया था, ताकि युवाओं को सीखने, स्किल हासिल करने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद मिल सके।"
उन्होंने कहा कि स्कीम छात्रों को करियर गाइडेंस, इंडस्ट्री-ओरिएंटेड ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट के मौके देकर शिक्षा और रोजगार के बीच के अंतर को कम करने के लिए बनाई गई थी।
उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम ने हजारों युवाओं को अपनी रोजगार क्षमता बेहतर करने और बेहतर करियर के मौके तलाशने में मदद की है। इस पहल का नाम बदलने से इसकी विरासत या इससे फायदा उठाने वालों की सराहना कम नहीं होगी। किसी स्कीम का नाम बदलने से उसके लाभार्थियों की यादें या उनके जीवन पर पड़े असर को मिटाया नहीं जा सकेगा।
स्टालिन ने ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ चेतावनी दी, जिससे यह प्रोग्राम कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद युवाओं का सशक्तीकरण प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि छात्रों और नौकरी चाहने वालों की मदद करने वाली पहल में बाधा डालना तमिलनाडु की युवा पीढ़ी के विकास में रुकावट डालने जैसा होगा।
उन्होंने कहा, "तमिलनाडु के युवाओं की तरक्की कभी भी राजनीति की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।"
--आईएएनएस
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