सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव पर मोहन भागवत का सशक्त संदेश: गृह मंत्री अमित शाह
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के नागपुर में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में दिए गए संबोधन को सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव पर सशक्त संदेश बताया। उन्होंने इस संबोधन का वीडियो साझा करते हुए लोगों से इसे सुनने की अपील की।
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट में कहा कि आरएसएस प्रमुख ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और समाज में एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।
उन्होंने लिखा, "नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव पर एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने देश को बांटने और समाज में अराजकता फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहने का आह्वान किया और एक एकजुट, संगठित एवं सशक्त समाज के निर्माण की बात कही।"
केंद्रीय गृह मंत्री ने मोहन भागवत के संबोधन का वीडियो साझा करते हुए लोगों से इसे सुनने की अपील की। उन्होंने इस भाषण को देश की एकता, अखंडता और उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पित बताया। गृह मंत्री शाह ने कहा, "परम पूजनीय मोहन भागवत जी का राष्ट्र की एकता, अखंडता और उज्ज्वल भविष्य को समर्पित यह प्रेरणादायी उद्बोधन अवश्य सुनना चाहिए।"
गौरतलब है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के स्थापना दिवस पर नागपुर में आयोजित वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित किया था। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के सामने मौजूद चुनौतियों, सामाजिक एकजुटता तथा संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बात की थी।
भागवत ने कहा था कि भारत को ऐसी ताकतों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो स्थापित संस्थाओं, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक व्यवस्था का विरोध करती हैं। फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों में हुई घटनाएं समाज के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों को दर्शाती हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत एक विशाल और विकासशील देश है और यहां भी कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों, कानून-व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के आचरण से समाज में नफरत, कटुता या विभाजन की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
भागवत ने कहा, "चाहे विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह हों, कानून-व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारी हों या राजनीतिक नेता, किसी के भी आचरण से हमारे एकजुट समाज में टकराव, नफरत, कटुता या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। भावनाएं कितनी भी प्रबल क्यों न हों, हमारे आचरण को संविधान, कानून और सभ्य मर्यादा की सीमाओं के भीतर रहना चाहिए।"
--आईएएनएस
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