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लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने सहकारी समितियों के विस्तार पर जोर दिया, कोटा-बूंदी में डेयरी क्षेत्र की समीक्षा की

नई दिल्ली/जयपुर, 27 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष और कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला ने कोटा-बूंदी क्षेत्र में डेयरी क्षेत्र के एकीकृत विकास की समीक्षा और उसमें तेजी लाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
 
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने सहकारी समितियों के विस्तार पर जोर दिया, कोटा-बूंदी में डेयरी क्षेत्र की समीक्षा की

नई दिल्ली/जयपुर, 27 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष और कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला ने कोटा-बूंदी क्षेत्र में डेयरी क्षेत्र के एकीकृत विकास की समीक्षा और उसमें तेजी लाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

संसद भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। चर्चा का मुख्य केंद्र सहकारी समितियों के माध्यम से डेयरी प्रणाली को मजबूत करना और पशुपालकों के लिए आय के अवसरों को बढ़ाना था।

जिन प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया उनमें डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार, दूध प्रसंस्करण अवसंरचना को सुदृढ़ करना, दूध और डेयरी उत्पादों के विपणन में सुधार करना और बेहतर प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से पशुधन उत्पादकता को बढ़ावा देना शामिल था।

डेयरी मूल्य श्रृंखला के डिजिटलीकरण, खाद प्रबंधन और क्षमता निर्माण पहलों पर भी जोर दिया गया। बिरला ने क्षेत्र में पूरे वर्ष हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छोटे पैमाने पर बायोगैस इकाइयां और चारा उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के प्रस्तावों पर चर्चा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पशुओं की नस्लों में सुधार लाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान का दायरा बढ़ाएं, साथ ही इन पहलों के कार्यान्वयन पर नियमित प्रगति रिपोर्ट भी मांगें।

खरीद प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, बिरला ने बल दिया कि दूध संग्रहण को अधिकतम करने के लिए डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार किया जाना चाहिए, जिससे किसानों को पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने इस संबंध में कोटा मिल्क यूनियन को विशेष निर्देश जारी किए। अध्यक्ष ने कोटा मिल्क यूनियन और 'उजाला एमपीओ' के माध्यम से प्रत्येक गांव तक डेयरी सहकारी नेटवर्क का विस्तार करने, उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाने और संग्रहण केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक दूध परीक्षण उपकरण और थोक दूध कूलर स्थापित करने का आह्वान किया।

उन्होंने किसानों के बैंक खातों में सीधे 100 प्रतिशत डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने और स्वच्छ दूध उत्पादन पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।

--आईएएनएस

एमएस/