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महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून पर सपा और कांग्रेस ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने बुधवार को राज्य में 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को लागू करने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा कानून नागरिकों को अपनी मर्जी से धर्म बदलने की पूरी इजाजत देता है और इस तरह के कानून से सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है।
 

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने बुधवार को राज्य में 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को लागू करने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा कानून नागरिकों को अपनी मर्जी से धर्म बदलने की पूरी इजाजत देता है और इस तरह के कानून से सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है।

राज्य में सत्ताधारी महायुति सरकार के नेताओं ने कहा कि यह कानून उन लोगों के लिए जरूरी है जिन्हें धर्म के नाम पर गुमराह किया जाता है और फंसाया जाता है।

महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर नोटिफाई किया है कि 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' (जिसे आमतौर पर धर्मांतरण-विरोधी कानून कहा जाता है) 28 अगस्त से पूरे राज्य में लागू हो जाएगा।

कार्यकारी मंजूरी मिलने के बाद राज्य के गृह विभाग ने 17 अगस्त को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया था।

इसे लागू करने के साथ ही महाराष्ट्र भारत का 13वां ऐसा राज्य बन गया है, जिसने जबरदस्ती या धोखे से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने वाला कड़ा कानून बनाया है।

सपा नेता एसटी हसन ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए कहा कि यह कानून के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। अगर कोई बालिग पुरुष या महिला अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो कानून इसकी पूरी इजाजत देता है। अगर कोई दबाव या लालच में आकर धर्म बदलता है तो यह गलत है और ऐसा धर्म परिवर्तन बाद में रद्द कर दिया जाता है। हर किसी को अपना धर्म बदलने की आजादी है। लोग हिंदू धर्म से इस्लाम और इस्लाम से हिंदू धर्म में जा रहे हैं, और इस्लाम से ईसाई धर्म में भी जा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि यह कानून काम करेगा। इससे सांप्रदायिक सद्भाव और बिगड़ेगा।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सवाल उठाते हुए कहा, "लोग चाहें तो धर्म बदल सकते हैं, मुस्लिम लड़कियां हिंदू पुरुषों से शादी भी करती हैं।"

उन्होंने ​​कहा, "महाराष्ट्र सरकार नई पीढ़ी को धर्म के नाम पर बांध नहीं सकती।"

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कानून लागू करने से पहले इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।

हालांकि, शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने साफ किया कि यह कानून किसी खास समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा कि लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह नहीं किया जाना चाहिए और न ही फंसाया जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।

उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के लिए राजपत्र इसलिए जारी किया गया है क्योंकि हमने संभावित धर्मांतरण के कई मामले देखे हैं।

भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि किसी का धर्म जबरदस्ती बदलने, या लालच देकर या प्रलोभन देकर धर्म बदलने की कोई भी कोशिश पूरी तरह गलत है।

उन्होंने कहा, "इसलिए, हर व्यक्ति का अपना धर्म होता है और उसे उस पर गर्व होता है, लेकिन अगर कोई किसी की गरीबी का फायदा उठाकर उन्हें कुछ समय के लिए फायदे दे और फिर उनका धर्म बदलवा दे तो इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है? महाराष्ट्र के नाम में ही 'महा' है, यह संतों की धरती है, इसलिए, यहां किसी को भी लालच या किसी और वजह से जबरदस्ती किसी का धर्म बदलने का अधिकार नहीं है।"

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी