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केरल: वडाकारा से छह बार सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का निधन

कोझिकोड, 3 मार्च (आईएएनएस)। केरल के वडाकारा से छह बार सांसद रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का 89 वर्ष की आयु में मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन से तीन दशकों से अधिक के उनके राजनीतिक करियर का अंत हो गया। के.पी. उन्नीकृष्णन का जन्म 20 सितंबर 1936 को मालाबार तट एक परिवार में हुआ था। वे ई. कुन्हीकन्नन नायर के पुत्र थे।
 
केरल: वडाकारा से छह बार सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का निधन

कोझिकोड, 3 मार्च (आईएएनएस)। केरल के वडाकारा से छह बार सांसद रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का 89 वर्ष की आयु में मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन से तीन दशकों से अधिक के उनके राजनीतिक करियर का अंत हो गया। के.पी. उन्नीकृष्णन का जन्म 20 सितंबर 1936 को मालाबार तट एक परिवार में हुआ था। वे ई. कुन्हीकन्नन नायर के पुत्र थे।

उन्नीकृष्णन ने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं से कानून की डिग्री पूरी की। 1960 के दशक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने से पहले, समाजवादी पार्टी और प्रजा समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। 1962 तक वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बन चुके थे। पूर्णकालिक राजनीति में आने से पहले उन्नीकृष्णन ने पत्रकार के रूप में भी काम किया और मातृभूमि और अन्य पत्रिकाओं में विशेष संवाददाता के रूप में लेख लिखे।

कांग्रेस ने वर्ष 1971 में वडाकारा संसदीय सीट से उन्नीकृष्णन पहली बार चुनावी मैदान में उतारा। उन्नीकृष्णन ने लगातार छह लोकसभा चुनाव जीते। उन्होंने 1971, 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 वडाकारा से जीतकर संसद पहुंचे। उनका वडाकारा की जनता से काफी जुड़ाव रहा।

वर्ष 1980 में उन्नीकृष्णन अखिल भारतीय कांग्रेस का दामन छोड़कर कांग्रेस (यू) में शामिल हो गए और बाद में 1984 में भारतीय कांग्रेस (समाजवादी) में शामिल हो गए थे। वडाकारा से उनको वर्ष 1996 में एक हार का सामना करना पड़ा था। बता दें कि वर्ष 1981 से 1984 के बीच, उन्होंने संसद में कांग्रेस (धर्मनिरपेक्ष) के नेता के रूप में काम किया और 1980 से 1982 तक लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।

उन्नीकृष्णन ने वर्ष (1989-90) में वी. पी. सिंह के मंत्रिमंडल में दूरसंचार, जहाजरानी और भूतल परिवहन मंत्री रहे। अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान, उन्होंने खाड़ी युद्ध संकट के दौरान भारतीयों को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1996 में अपनी हार के बाद सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। उन्होंने अपना समय नई दिल्ली और कोझिकोड जिले के पन्नियानकारा स्थित अपने पैतृक घर में गुजारा और पढ़ने-लिखने में अपना समय व्यतीत किया।

--आईएएनएस

एसडी/एएस