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भारत के प्रोसेस्ड फूड की दुनिया में मांग बढ़ी, कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यात में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में निर्मित प्रोसेस्ड फूड की पूरी दुनिया में मांग बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इस कारण देश के कुल कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यात में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गई है, जो कि 2014-15 में 13.7 प्रतिशत थी। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई।
 
भारत के प्रोसेस्ड फूड की दुनिया में मांग बढ़ी, कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यात में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में निर्मित प्रोसेस्ड फूड की पूरी दुनिया में मांग बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इस कारण देश के कुल कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यात में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गई है, जो कि 2014-15 में 13.7 प्रतिशत थी। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई।

सरकार ने बताया कि प्रोसेस्ड फूड सेक्टर देश में संगठित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सबसे बड़े रोजगार प्रदाता में से एक है और कुल संगठित क्षेत्र के रोजगार में इसकी हिस्सेदारी 12.83 प्रतिशत है।

प्रोसेस्ड फूड सेक्टर की ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2.24 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 में 1.34 करोड़ रुपए थी।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2014 से मार्च 2025 के दौरान इस क्षेत्र में 7.33 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हुआ है।

मंत्रालय ने कहा, “खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि आय बढ़ाने और कृषि से इतर रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही संरक्षण और प्रसंस्करण अवसंरचना में कृषि और संबद्ध क्षेत्र के उत्पादन में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है।”

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) को 14वें वित्त आयोग चक्र के लिए 2016-20 (जिसे 2020-21 तक बढ़ाया गया) की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी, और पुनर्गठन के बाद 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान 6,520 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ इसे जारी रखने की मंजूरी दी गई है।

मंत्रालय ने बताया कि जनवरी 2025 से, पीएमकेएसवाई की विभिन्न घटक योजनाओं के तहत 36 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, और 94 परियोजनाएं पूरी/चालू हो चुकी हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता 28.48 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।

स्वीकृत परियोजनाओं के चालू होने के बाद, इनसे 365.21 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है, जिससे लगभग 1.4 लाख किसानों को लाभ होगा और 0.09 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।

--आईएएनएस

एबीएस/