144 करोड़ रुपए के 'पंप एंड डंप' घोटाले में सेबी का बड़ा एक्शन, 221 संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध, मास्टरमाइंड हनीफ शेख 7 साल के लिए बैन
मुंबई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने शेयर बाजार में 5 लिस्टेड कंपनियों से जुड़ी एक 'इंडस्ट्रियल-स्केल' की स्टॉक हेरफेर (मैनिपुलेशन) स्कीम का खुलासा करते हुए 221 संस्थाओं को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।
नियामक ने कथित 'पंप एंड डंप' ऑपरेशन की वर्षों लंबी जांच के बाद ब्याज सहित करीब 144 करोड़ रुपए की अवैध कमाई को वापस जमा कराने का भी आदेश दिया है।
सेबी ने अपने 394 पन्नों के अंतिम आदेश में व्यक्तिगत निवेशक हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। जांच के अनुसार यह कथित घोटाला 2017 से 2020 के बीच संचालित किया गया, जिसमें मौर्या उद्योग, 7एनआर रिटेल, दार्जिलिंग रोपवे कंपनी, जीबीएल इंडस्ट्रीज और विशाल फैब्रिक्स जैसी पांच सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों और ट्रेडिंग वॉल्यूम में कृत्रिम तरीके से उछाल लाया गया। इसके बाद इन शेयरों को ऊंची कीमत पर खुदरा निवेशकों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया।
सेबी के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में 200 से अधिक संस्थाएं शामिल थीं, जिनमें से प्रत्येक ने योजना को अंजाम देने में एक विशिष्ट भूमिका निभाई। आरोप है कि शुरुआत में आपस में जुड़े ट्रेडरों ने सिंक्रोनाइज्ड और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए इन कंपनियों के शेयरों में कृत्रिम मांग पैदा की, जिससे शेयरों की कीमत और ट्रेडिंग गतिविधि दोनों तेजी से बढ़ गईं।
जब शेयरों की कीमत और तरलता (लिक्विडिटी) पर्याप्त बढ़ गई, तब इस नेटवर्क ने बड़े पैमाने पर एसएमएस अभियान चलाकर खुदरा निवेशकों को इन शेयरों को खरीदने के लिए प्रेरित किया। सेबी के अनुसार, हजारों निवेशकों को ऐसे सेंडर आईडी से संदेश भेजे गए, जो प्रतिष्ठित ब्रोकरेज कंपनियों जैसे दिखाई देते थे। इससे निवेशकों को इन संदेशों पर भरोसा हुआ और उन्होंने बड़ी संख्या में शेयर खरीदना शुरू कर दिया।
जैसे ही खुदरा निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, नेटवर्क से जुड़ी दूसरी संस्थाओं ने अपने शेयर ऊंची कीमत पर बेच दिए और भारी मुनाफा कमाया। सेबी की जांच में सामने आया कि इस अवैध कमाई को कई परतों वाले नेटवर्क के जरिए विभिन्न कंपनियों, फाइनेंसरों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों के माध्यम से घुमाया गया, ताकि अंततः यह रकम कंपनी के प्रमोटरों या हनीफ शेख से जुड़े संस्थानों तक पहुंच सके और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके।
नियामक ने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि यही मध्यस्थ संस्थाएं पांचों कंपनियों के मामलों में बार-बार सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित शेयर हेरफेर अभियान था।
सेबी ने इस पूरे घोटाले से हुई 143.79 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का अनुमान लगाया है और सभी संबंधित पक्षों को अक्टूबर 2020 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ यह राशि वापस जमा करने का निर्देश दिया है।
कार्रवाई के तहत हनीफ शेख को 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है और उस पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। शेख से जुड़ी पांच संस्थाओं को 6 वर्षों के लिए बाजार से बाहर कर दिया गया है और प्रत्येक पर 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
वहीं, इस नेटवर्क में शामिल अन्य प्रतिभागियों को उनकी भूमिका के आधार पर 5 वर्ष तक के प्रतिबंध और 5 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
सेबी ने बताया कि उसकी जांच ट्रेडिंग रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल फोन डेटा, व्हाट्सएप चैट, वेबसाइट पंजीकरण विवरण और दूरसंचार कंपनियों, ट्रैवल एजेंसियों तथा वित्तीय संस्थानों से प्राप्त सूचनाओं सहित कई प्रकार के डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों पर आधारित थी।
नियामक ने कहा कि इन सबूतों से एसएमएस अभियान चलाने और व्यापक हेरफेर नेटवर्क के संचालन में शेख की भूमिका साबित होती है।
--आईएएनएस
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