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राम मंदिर ट्रस्ट मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा, जिनमें अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के इस्तेमाल में वित्तीय गड़बड़ियों की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
 

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा, जिनमें अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के इस्तेमाल में वित्तीय गड़बड़ियों की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश कॉज-लिस्ट के अनुसार, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 13 जुलाई को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

इन मामलों में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से खुद दायर की गई एक रिट याचिका, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ दायर एक क्रिमिनल रिट याचिका और राजद सांसद सुधाकर सिंह की एक याचिका शामिल है।

इससे पहले, जब जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने गोस्वामी की याचिका का जिक्र किया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मामले को तुरंत लिस्ट करने पर जोर दिया था और कहा था कि लगाए गए आरोप 'बहुत गंभीर' हैं।

मामले की अर्जेंसी पर सवाल उठाते हुए जस्टिस सुंदरेश की अगुवाई वाली बेंच ने निर्देश दिया था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले को लिस्ट किया जाए।

गोस्वामी की याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में दिए गए दान से जुड़े रिकॉर्ड और सबूतों को सुरक्षित रखने और मंदिर में चढ़ावे के मैनेजमेंट में ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, मंदिर में देवता को चढ़ाया गया चढ़ावा 'पवित्र ट्रस्ट की संपत्ति' होती है जो एक कानूनी व्यक्ति (ज्यूरिस्टिक पर्सन) के तौर पर देवता के पास होती है और ऐसे चढ़ावे को संभालने वाले लोग पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के कर्तव्यों से बंधे ट्रस्टी होते हैं।

याचिका में मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसके अलावा, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की चल रही जांच की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट और ट्रस्ट के बनने के बाद से मिले सभी दान, चढ़ावे और कीमती चीजों के स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की गई है।

इसमें सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि वह राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में सार्वजनिक दान और चढ़ावे को पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए कम से कम संवैधानिक सुरक्षा उपाय बनाने का निर्देश दे।

हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह मामला तब शुरू हुआ जब सार्वजनिक रिपोर्टों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी से मंदिर में दान में अनियमितताओं, गबन और गलत तरीके से मैनेजमेंट का पता चला।

इस बीच, सांसद सुधाकर सिंह ने चल रही जांच को सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को सौंपने की मांग की है। उनकी याचिका में एक अस्थायी, कोर्ट की निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है।

इस कमेटी में रिटायर्ड ज्यूडिशियल अधिकारी और फाइनेंशियल एक्सपर्ट शामिल होंगे। यह कमेटी ट्रस्ट के सेक्युलर फाइनेंशियल मामलों, सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने, जांच पूरी होने तक बड़े फाइनेंशियल फैसलों पर रोक लगाने, एक व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट करने और ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट और डोनेशन लॉग्स को पब्लिश करने जैसे कामों की निगरानी करेगी।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी