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पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ असम सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को असम सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी गई अंतरिम राहत को चुनौती दी गई है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर दर्ज आपराधिक केस से जुड़ा है।
 
पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ असम सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को असम सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी गई अंतरिम राहत को चुनौती दी गई है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर दर्ज आपराधिक केस से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कॉजलिस्ट के अनुसार, यह मामला 15 अप्रैल को जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच के सामने लिस्टेड है।

असम सरकार ने एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर करके सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट के 10 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, ताकि वह असम पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के संबंध में नियमित जमानत के लिए सक्षम अदालत से संपर्क कर सकें।

जस्टिस के सुजाना की सिंगल-जज बेंच ने निर्देश दिया था कि अगर कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें एक हफ्ते के लिए अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए। खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जब असम पुलिस ने उन पर रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के मामले में केस दर्ज किया था।

तेलंगाना हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खेड़ा की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और कांग्रेस नेता को असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सवाल उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने यह दलील दी थी कि आरोप भले ही उन्हें गलत मान लिया जाए, ज्यादा से ज्यादा मानहानि के दायरे में आएंगे और उनके आधार पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। वहीं, याचिका का विरोध करते हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने तेलंगाना हाई कोर्ट में इस याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं इसलिए उनके पास असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस कारण नहीं है।

असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साज़िश के आरोप शामिल हैं। यह कार्रवाई खेड़ा के उन आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन्होंने कहा था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, दुबई में अघोषित आलीशान संपत्तियां और संयुक्त राज्य अमेरिका में शेल कंपनियां हैं।

इस विवाद ने असम विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच एक तीखी राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा कर दी थी। कांग्रेस ने खेड़ा का खुलकर समर्थन किया और हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खेड़ा का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के बजाय असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार को उन पर लगाए गए आरोपों का जवाब देना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके