राज्यसभा नामांकन विवाद: मीनाक्षी नटरजन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की वेकेशन बेंच ने गुरुवार को नटराजन की ओर से पेश सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी के मामले को तुरंत लिस्ट करने के अनुरोध पर शुक्रवार को जल्द सुनवाई का भरोसा दिया।
मामले का जिक्र करते हुए सिंघवी ने कहा कि गुरुवार नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख थी। उन्होंने यह तर्क दिया कि अगर इस मामले पर तुरंत सुनवाई नहीं की गई, तो याचिकाकर्ता को असरदार राहत पाने के लिए छह साल तक इंतजार करना पड़ेगा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया कि विवाद का निपटारा होने तक चुनाव नतीजों की घोषणा पर रोक लगाई जाए। हालांकि, जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।
रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर वकील डीएस नायडू ने तत्काल दखल देने की याचिका का विरोध किया।
बता दें कि कांग्रेस नेता ने भाजपा की आपत्तियों के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उनके नॉमिनेशन पेपर खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
आपत्ति के अनुसार, नटराजन ने कथित तौर पर अपने नामांकन पत्रों के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना की अदालत में लंबित एक मामले का विवरण नहीं दिया।
भाजपा की आपत्ति हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ए श्रीलता द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था। श्रीलता ने रेड्डी पर छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोप लगाए थे।
वहीं, नटराजन ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है और हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का विरोध किया है।
इससे पहले, कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर प्रभावित थे और सरकार के इशारे पर काम कर रहे थे।
मध्य प्रदेश से पार्टी की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार रहीं कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनके नामांकन को खारिज करके लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर स्वतंत्र संवैधानिक अधिकारियों के बजाय सत्ताधारी दल के प्रवक्ताओं के तौर पर काम कर रहे थे।
--आईएएनएस
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