सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला के दो और नगर निगम वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का दिया आदेश
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को पंजाब के पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया। वहीं, कोर्ट ने धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 के लिए भी इसी तरह के निर्देश मांगने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि ये दोनों वार्ड फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में शामिल नहीं थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की पीठ जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल थे ने शुक्रवार को एक आदेश पारित किया। यह आदेश पंजाब के नगर निकायों के कुछ वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने के संबंध में 28 सितंबर को दिए गए पिछले आदेश पर स्पष्टीकरण और निर्देश मांगने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया।
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने पिछले आदेश के पैराग्राफ 11 और 12 में संशोधन करते हुए कहा, "नए सिरे से चुनाव कराने के उद्देश्य से पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 को भी इसमें शामिल किया गया है।"
आदेश में आगे कहा गया, "परिणामस्वरूप, पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 में नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।"
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग वाली एक अलग याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, "नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश जस्टिस निर्मलजीत कौर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को पूरी तरह से स्वीकार करते हुए दिए गए हैं, इसलिए हम धर्मकोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 और 11 को शामिल करने की मांग वाली इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते।"
पीठ ने आगे कहा, "हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ये वार्ड जस्टिस निर्मलजीत कौर की रिपोर्ट में शामिल नहीं हैं।"
इसके अनुसार, दोनों विविध आवेदनों का निपटारा कर दिया गया।
इससे पहले 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के नगर निकायों के 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस निर्मलजीत कौर के नेतृत्व वाले एक जांच आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया था।
आयोग ने नगर निकाय चुनावों के नामांकन-प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर बाधा डालने के आरोपों की जांच की थी। इन आरोपों में नामांकन पत्र छीने जाने, फाड़े जाने या नष्ट किए जाने, और उम्मीदवारों के साथ मारपीट, उन्हें हिरासत में लेने या उन्हें धमकाने जैसी घटनाएं शामिल थीं।
आयोग की रिपोर्ट में पाया गया कि 50 वार्डों के चुनाव प्रभावित हुए थे, जिनमें पटियाला जिले के 28 और मोगा जिले के 22 वार्ड शामिल हैं, जिसके चलते वहां फिर से चुनाव कराने की जरूरत थी।
आयोग को पटियाला नगर निगम के वार्ड नंबर 15 और 58 में फर्जी या एक से अधिक बार वोट डालने और लोगों को डराने-धमकाने के गंभीर सबूत भी मिले, जो इन चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने के लिए काफी थे।
इन निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिन्हित वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया। साथ ही, पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बार के वरिष्ठ सदस्यों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जाए। इसके अलावा, चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए नामांकन-प्रक्रिया, नामांकन पत्रों की जांच, चुनाव चिह्नों के आवंटन और मतदान की वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया।
पूरी चुनाव-प्रक्रिया को छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया था।
--आईएएनएस
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