केरल: सीएम वी.डी. सतीशन ने स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया, वंदे मातरम नहीं गाया गया
तिरुवनंतपुरम, 15 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सेंट्रल स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस की सलामी ली और पी. विजयन के अलावा एक दशक में राज्य के मुख्य 15 अगस्त समारोह की अध्यक्षता करने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए।
अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की जीत के बाद विजयन का लंबा कार्यकाल समाप्त होने पर पदभार संभालने वाले सतीशन ने राष्ट्रगान की धुन पर तिरंगा फहराया और औपचारिक परेड का निरीक्षण किया।
हालांकि, राज्य स्तरीय समारोह में वंदे मातरम नहीं गाया गया। यह गीत राज्य भर में सरकार द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों और स्कूली समारोहों में भी अनुपस्थित रहा।
सेंट्रल स्टेडियम से कुछ ही दूरी पर यह विरोधाभास विशेष रूप से स्पष्ट था। भाजपा शासित तिरुवनंतपुरम नगर निगम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में वंदे मातरम गाया गया, जो राज्य की राजधानी में लगभग एक साथ आयोजित होने वाले दो समारोहों के अलग-अलग राजनीतिक स्वरूपों को उजागर करता है।
कोझिकोड में भी ऐसा ही विरोधाभास देखने को मिला। जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ पार्षदों ने राष्ट्रगान में भाग लिया। वहीं, भाजपा सदस्यों ने वंदे मातरम गाया, जिससे स्वतंत्रता दिवस का एक और अनोखा दृश्य सामने आया। यह दृश्य उस राज्य में देखने को मिला, जहां दोनों मोर्चों और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है।
सेंट्रल स्टेडियम में मुख्यमंत्री के रूप में सतीशन का पहला स्वतंत्रता दिवस भाषण महज एक औपचारिक भाषण से कहीं अधिक था। यह उन राजनीतिक और संवैधानिक मूल्यों की पुष्टि थी, जिनके बारे में नई सरकार का कहना है कि वे केरल का मार्गदर्शन करेंगे।
हाल ही में हुई आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सतीशन ने घोषणा की कि उनकी सरकार बाढ़ से निपटने और उसे रोकने के लिए एक वैज्ञानिक प्रणाली लागू करेगी और पीड़ितों के परिवारों को सहायता प्रदान करने का वादा किया।
जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और घृणा को त्यागकर केरल को आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए सतीशन ने कहा कि कल्याणकारी उपाय दान नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक अधिकार हैं।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 1947 के प्रसिद्ध स्वतंत्रता दिवस संदेश का उल्लेख किया, विशेष रूप से उस प्रतिज्ञा का कि जब तक लोग कष्ट झेलते रहेंगे, देश का काम समाप्त नहीं हो सकता। सतीशन ने उस संदेश को केरल की मौजूदा चुनौतियों, बेरोजगारी, गरीबी, बीमारी, कृषि संकट, श्रमिकों और तटीय समुदायों की समस्याओं और हाशिए पर पड़े वर्गों की कठिनाइयों से जोड़ा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हालिया विवाद का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए सतीशन ने जातिगत पूर्वाग्रह और अस्पृश्यता की वापसी के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि संवैधानिक पदों पर आसीन एक वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को भी जाति के आधार पर अपमानित किया गया था।
उन्होंने युवा पीढ़ी पर भी काफी जोर दिया और कहा कि केरल के युवा राजनीतिक रूप से जागरूक हैं। अपने आसपास हो रही घटनाओं को पहचानने में सक्षम हैं और देश के लिए एक सुधारक शक्ति बनने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं।
शेष 13 जिला मुख्यालयों में सतीशन के मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने स्वतंत्रता दिवस परेड में सलामी ली, जो नई यूडीएफ सरकार के तहत पहले राज्यव्यापी समारोहों का प्रतीक है।
--आईएएनएस
एसएचके/एएस
