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संभल प्रशासन ने 'अवैध' ईदगाह और मस्जिद को गिराया, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने की आलोचना

संभल (उत्तर प्रदेश), 14 जुलाई (आईएएनएस)। कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए, जिला प्रशासन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 'सरकारी जमीन पर बनी' कथित तौर पर अवैध मस्जिद और ईदगाह को गिरा दिया।
 

संभल (उत्तर प्रदेश), 14 जुलाई (आईएएनएस)। कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए, जिला प्रशासन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 'सरकारी जमीन पर बनी' कथित तौर पर अवैध मस्जिद और ईदगाह को गिरा दिया।

यह तोड़-फोड़ की कार्रवाई असमोली पुलिस स्टेशन इलाके में भारी सुरक्षा के बीच की गई।

अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले ईदगाह की 25 फुट ऊंची मीनार को गिराया गया, जबकि बाकी ढांचे को गिराने का काम दोपहर तक चलता रहा।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आसपास के इलाकों के लोगों को मौके पर इकट्ठा होने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के 100 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया था।

जिला प्रशासन के मुताबिक, सरकारी कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद और ईदगाह बनाने को लेकर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। जमीन की पैमाइश के बाद पता चला कि ये ढांचे गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए थे।

इसके बाद, तहसीलदार की अदालत ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत दोनों ढांचों को गिराने का आदेश दिया।

संभल के जिला मजिस्ट्रेट अंकित खंडेलवाल ने आईएएनएस को बताया, "गांव में कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी। इस मामले की सुनवाई तहसीलदार की अदालत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत हुई। सुनवाई के बाद, कब्जे को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया। ऐसे संकेत भी मिले थे कि जमीन पर प्लॉट विकसित करने की कोशिश की जा रही थी। लगभग 10.5 बीघा जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया है। यह हाईवे के किनारे की कीमती जमीन है, जिसकी कीमत कम से कम 5 करोड़ रुपए आंकी गई है। प्रशासन ने अब जमीन का कब्जा ले लिया है और इसका इस्तेमाल सरकारी और जन-कल्याण के कामों के लिए किया जाएगा।"

हालांकि, इस तोड़-फोड़ की कार्रवाई की ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने आलोचना की। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, "संभल में ग्राम सभा की जमीन पर बनी ईदगाह को गिराना गलत है। यह तय करना अदालत का काम है कि यह कानूनी है या गैरकानूनी। जिला कलेक्टर को एक अर्जी दी गई थी, जिन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। ईद की नमाज हर दिन नहीं पढ़ी जाती है। मैं इसे गिराए जाने की कड़ी निंदा करता हूं।"

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद तहसीलदार कोर्ट के आदेश के पालन में की गई थी और मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल सरकारी और जन-कल्याण के कामों के लिए किया जाएगा।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम