Aapka Rajasthan

आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों ने 'जनसांख्यिकीय असंतुलन' पर जताई चिंता, कहा- 'सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ता है'

विशाखापत्तनम, 21 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) और उससे जुड़े संगठनों ने जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे कुछ इलाकों में सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ता है।
 

विशाखापत्तनम, 21 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) और उससे जुड़े संगठनों ने जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे कुछ इलाकों में सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ता है।

विशाखापत्तनम के पास गुदिलोवा में शुक्रवार को संपन्न हुई आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों की तीन दिन की ऑल-इंडिया कोऑर्डिनेशन मीटिंग में आबादी में बदलाव के मुद्दे पर चर्चा हुई।

मीडिया को जानकारी देते हुए आरएसएस के संयुक्त महासचिव सी.आर. मुकुंद ने बताया कि आबादी में बदलाव और असंतुलन को लेकर गंभीर चर्चा हुई। कई देश बढ़ती उम्र की आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं।

मीटिंग में दुनिया भर के कई देशों में बढ़ती उम्र की आबादी और घटते प्रजनन दर से पैदा होने वाली चुनौतियों के संदर्भ में भारत की स्थिति का जायजा लिया गया।

मुकुंद ने कहा कि भले ही भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन आबादी के जानकारों ने अगले 3-4 दशकों में भारत में भी ऐसी ही स्थिति होने का अनुमान लगाया है।

उन्होंने कहा, "प्रजनन दर का कम होना एक मुद्दा है, लेकिन आबादी में असंतुलन भी है, जिस पर हमने चर्चा की है। इसका कुछ इलाकों में सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ रहा है।"

उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी और दूसरे समुदायों की आबादी में कमी के कारण इस असंतुलन को मीटिंग में गंभीरता से लिया गया। अलग-अलग इलाकों और समुदायों में आबादी के बदलते अनुपात और उनके सामाजिक असर को देखते हुए समाज में संतुलन और सद्भाव बनाए रखने पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा, "हमने चर्चा की कि एनजीओ और संघ से प्रेरित दूसरे संगठनों के तौर पर हम क्या कर सकते हैं। हम सोच-विचार और योजना बना रहे हैं। युवा पीढ़ी की सोच, उम्मीदों, रचनात्मक क्षमता और भविष्य से जुड़ी चिंताओं के साथ-साथ राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संघ बड़ी संख्या में युवाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। इस साल, लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने संघ के 21 दिन के ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया।"

आरएसएस के संयुक्त महासचिव ने कहा कि देश भर में रोजाना लगने वाली 'शाखाओं' में शामिल होने वाले स्वयंसेवकों में 60 प्रतिशत से ज्यादा युवा होते हैं।

इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं के साथ सिर्फ उपदेशात्मक बातचीत करने के बजाय, उनसे सीधा जुड़ाव बनाना, उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझना और सार्थक बातचीत के जरिए देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति अपनापन की भावना पैदा करना जरूरी है।

जंतर-मंतर पर युवाओं के हालिया विरोध-प्रदर्शन के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए, आरएसएस नेता ने कहा कि उन्हें लगता है कि ऐसा सिस्टम में कुछ कमियों की वजह से हुआ है। इस मुद्दे पर बैठक में चर्चा हुई।

मुकुंद ने कहा कि आरएसएस और उससे जुड़े संगठन चाहते हैं कि सिस्टम ठीक से काम करे और इसके लिए सरकार को कुछ कदम उठाने होंगे।

बैठक में नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे पर भी गंभीर चिंता जताई गई। देश के युवाओं और छात्रों के बीच नशीली दवाओं की बढ़ती उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की गई। इस बात पर जोर दिया गया कि इस समस्या का समाधान सिर्फ सरकार या पुलिस के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी से किया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम