शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर 20.72 लाख की ठगी, प्राइवेट बैंक के डिप्टी मैनेजर समेत तीन गिरफ्तार
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 20.72 लाख रुपए की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने प्राइवेट बैंक के डिप्टी मैनेजर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कन्हैया दास (36), राहुल टेलर (28) और एक प्राइवेट बैंक के डिप्टी मैनेजर आरिफ हुसैन मंसूरी (35) के तौर पर हुई है। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल भी बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ित को शेयर मार्केट में पैसा लगाने पर ज्यादा और अच्छा रिटर्न देने का लालच दिया। इसके बाद पीड़ित साइबर फ्रॉड करने वालों के हाथों 20,72,000 रुपए गंवा बैठा।
जांच में पता चला कि कन्हैया दास ने ठगी की रकम लेने के लिए अपना बैंक अकाउंट दिया था, जबकि राहुल टेलर ने सेल्फ-चेक के जरिए कैश निकालने में मदद की और मनी ट्रांसफर की गतिविधियों में भी शामिल था।
आगे की जांच और आरोपियों से बरामद डिजिटल डिवाइस के एनालिसिस से पुलिस ने मंसूरी की पहचान की, जिसने 2 परसेंट कमीशन के बदले बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने में मदद की थी।
साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में साइबर फ्रॉड के बारे में एक ऑनलाइन शिकायत मिली, जिसमें पीड़ित ने बताया कि शेयर मार्केट में निवेश से अच्छे रिटर्न का लालच देकर उससे 20.72 लाख रुपए की ठगी की गई।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। अपराध की टेक्निकल प्रकृति और साइबर फ्रॉड करने वालों के काम करने के तरीके को देखते हुए मामले की जांच के लिए एसआई अशांग, एससी अमित और कॉन्स्टेबल रविंदर की एक खास टीम बनाई गई।
जांच के दौरान, पुलिस टीम ने मनी ट्रेल, बैंक अकाउंट रिकॉर्ड, टेक्निकल फुटप्रिंट, मोबाइल नंबर और बेनिफिशियरी अकाउंट से जुड़ी लोकेशन की डिटेल का बारीकी से एनालिसिस किया।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम एक बैंक अकाउंट के जरिए भेजी गई थी और बाद में चेक से निकाली गई थी। ट्रांजैक्शन पैटर्न और टेक्निकल सर्विलांस के एनालिसिस से पुलिस को राजस्थान के उदयपुर के मावली में आरोपियों के ऑपरेशनल बेस का पता लगाने में मदद मिली।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कन्हैया दास वह खाताधारक था, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल रकम को पाने के लिए किया गया था, जबकि टेलर ने सेल्फ चेक के जरिए कैश निकालने में मदद की और मनी ट्रांसफर गतिविधियों में भी शामिल था। पुलिस ने बताया कि दास टैक्सी ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था, जबकि राहुल टेलर मनी ट्रांसफर के कारोबार में लगा हुआ था।
आगे की जांच से पता चला कि टेलर अपने मनी ट्रांसफर के कारोबार और कैश का इंतजाम करते समय मंसूरी के संपर्क में आया था और उसने बैंक अधिकारी से संपर्क किया, जिसने बाद में दास के बैंक खाते का इंतज़ाम करने में मदद की।
पुलिस के मुताबिक, बैंक खाते का इस्तेमाल 'सेकंड-लेयर अकाउंट' के तौर पर किया गया था, जिसके जरिए इस मामले से जुड़ी लगभग 2 लाख रुपए की रकम ट्रांसफर की गई थी।
आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे डिजिटल सबूत मिले जिनसे अपराध में मंसूरी की संलिप्तता का पता चला। इसके बाद उसे मावली से गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में यह भी पता चला कि मंसूरी अप्रैल 2024 से बैंक शाखा में काम कर रहा था और बैंकिंग इंतजाम में मदद करने के लिए उसे 2 प्रतिशत कमीशन मिला था।
दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे शेयर बाजार में निवेश और अन्य निवेश योजनाओं के जरिए ज्यादा मुनाफे का लालच देने वाले साइबर जालसाजों से सावधान रहें।
पुलिस ने लोगों को उन अनजान कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया प्रोफाइल या ऑनलाइन ग्रुप पर भरोसा न करने की चेतावनी दी है जो जल्दी या पक्के मुनाफे का वादा करते हैं। लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे कभी भी वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी), पासवर्ड, बैंकिंग क्रेडेंशियल या अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
पुलिस ने निवेशकों को यह भी सलाह दी है कि वे निवेश प्लेटफॉर्म की असलियत की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी हासिल करें।
साइबर धोखाधड़ी के मामले में, पीड़ितों से अपील की गई है कि वे तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए घटना की रिपोर्ट करें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके और धोखाधड़ी से गई रकम को वापस पाने की कोशिश की जा सके।
--आईएएनएस
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