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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों पर बढ़ते अत्याचारों का आरोप, मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

क्वेटा, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बलूच मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पाकिस्तान के अधिकारियों पर बलूचिस्तान में सैन्यीकरण और दमन का सुनियोजित अभियान चलाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि हिंसा और विस्थापन वहां आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।
 

क्वेटा, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बलूच मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पाकिस्तान के अधिकारियों पर बलूचिस्तान में सैन्यीकरण और दमन का सुनियोजित अभियान चलाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि हिंसा और विस्थापन वहां आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

बीवाईसी ने कहा कि सड़कों के किनारे बलूच नागरिकों के क्षत-विक्षत शवों का मिलना हिंसा की "क्रूरता और अमानवीयता" को दर्शाता है।

संगठन ने बयान में कहा, "बलूचिस्तान में जो हो रहा है वह अलग-अलग घटनाओं की श्रृंखला नहीं है, बल्कि सैन्यीकरण, आजीविका के विनाश, विस्थापन और नागरिक जीवन के खिलाफ हिंसा की एक सुनियोजित नीति है। क्षत-विक्षत शवों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जो हिंसा की अमानवीयता को दिखाता है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को शवों के बीच से गुजरते हुए अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जारी रखनी पड़ रही है।"

बीवाईसी ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार रहे बाग-बगीचों को कथित सरकारी नीति के तहत नष्ट किया जा रहा है, जिससे लोगों की जमीन और रोजगार दोनों खतरे में पड़ गए हैं।

संगठन ने कहा, "जब पूरी दुनिया जलवायु संकट के बीच जंगलों और जमीन को बचाने की कोशिश कर रही है, तब यहां पेड़ों को काटा जा रहा है।"

बीवाईसी ने आरोप लगाया कि मस्तुंग के शोर पारोद इलाके में स्थानीय समुदायों को पूरी तरह विस्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। संगठन के अनुसार यह केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि जमीन, पानी, पशुधन, आजीविका और पीढ़ियों से भूमि से जुड़े रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया है।

संगठन ने कहा कि यह घटनाएं बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ हिंसा के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। ग्वादर जिले के शदी-कौर इलाके का उदाहरण देते हुए उसने कहा कि वहां गांव खाली हो चुके हैं, खेत उजड़ गए हैं और समुदायों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

बीवाईसी के मुताबिक मस्तुंग के खडकोचा और आसपास के इलाकों में भी इसी तरह की स्थिति बन रही है, जहां नागरिक इलाकों के ऊपर ड्रोन मंडरा रहे हैं और लोग अपने ही बागों में काम करते समय मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।

संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाओं को "कोलैटरल डैमेज" कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, बल्कि इन्हें पाकिस्तान के अधिकारियों की नीतियों की मानवीय कीमत के रूप में देखा जाना चाहिए।

बीवाईसी ने दावा किया कि भय, आर्थिक तबाही, विस्थापन और हवाई हिंसा बलूचिस्तान में अलग-अलग समस्याएं नहीं, बल्कि एक ही रणनीति के हिस्से हैं, जिसका उद्देश्य लोगों के लिए उनकी जमीन को रहने लायक नहीं रहने देना है।

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वह बलूचिस्तान की स्थिति से मुंह न मोड़े। उसके अनुसार चुप्पी और निष्क्रियता इस हिंसा को अनदेखा किए जाने की अनुमति देती है।

--आईएएनएस

डीएससी