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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सिख दंपति हत्या मामला: मानवाधाकिर संगठनों ने की निंदा

इस्लामाबाद, 20 जून (आईएएनएस)। हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के गुरुद्वारे में सिख सेवादार दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने इसकी कड़ी निंदा की है। आयोग ने कहा कि इस घटना ने अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
 
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सिख दंपति हत्या मामला: मानवाधाकिर संगठनों ने की निंदा

इस्लामाबाद, 20 जून (आईएएनएस)। हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के गुरुद्वारे में सिख सेवादार दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने इसकी कड़ी निंदा की है। आयोग ने कहा कि इस घटना ने अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यह बयान उस घटना के बाद आया जिसमें अज्ञात हमलावरों ने मर्दान के बाबू मोहल्ला ख्वाजा गंज बाजार क्षेत्र स्थित गुरुद्वारे के अंदर कथित रूप से गोलीबारी की। इस हमले में 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एचआरसीपी ने कहा, “यह घटना न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि उन परिस्थितियों पर भी प्रश्न उठाती है जिनमें यह हमला हुआ। ऐसी रिपोर्ट्स कि कथित हमलावर स्थल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ था, विशेष जांच की मांग करती हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा संबंधी 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन में अधिक सख्त जांच-पड़ताल और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।”

एचआरसीपी ने मर्दान के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) द्वारा शुरुआती चरण में इस घटना को व्यक्तिगत दुश्मनी से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। आयोग ने कहा कि जांच के प्रारंभिक चरण में इतने आत्मविश्वास के साथ इस तरह के मकसद का निष्कर्ष किस आधार पर निकाला गया, यह स्पष्ट नहीं है।

आयोग ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मांग की कि वे मामले की सभी संभावित दिशाओं में गहन जांच करें और दोषियों को कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराएं।

इस घटना की निंदा करते हुए अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने कहा कि यह हत्या पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के नाजुक आश्वासनों पर हमला है।

वीओपीएम ने अपने बयान में कहा, “यह केवल दो व्यक्तियों पर हमला नहीं था; यह पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के उस कमजोर वादे पर हमला था। अधिकारियों ने इसे ‘लक्षित हमला’ बताया है, लेकिन बार-बार होने वाली हिंसा के सामने इस तरह की भाषा अब सामान्य और लगभग यांत्रिक हो चुकी है। जो नहीं बदलता, वह है लगभग एक सा पैटर्न! जिसमें अल्पसंख्यक पीड़ित है, तो धार्मिक स्थल असुरक्षित हैं, हमलावर अज्ञात हैं, और जांच का वही ढर्रा है जो शायद ही कभी न्याय दिला पाता है। 2022 के पेशावर से लेकर आज के मर्दान तक यह चक्र चिंताजनक रूप से जारी है।”

संगठन ने यह भी कहा कि यह हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के एक व्यापक और बेहद चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है।

--आईएएनएस

केआर/