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कोलकाता आरजी कर लिफ्ट हादसा : सात दिन पहले ही आई थी खराबी, जांच में बड़ा खुलासा

कोलकाता, 25 मार्च (आईएएनएस)। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लिफ्ट में हुई मौत की जांच से पता चला है कि दुखद घटना से ठीक सात दिन पहले उसी लिफ्ट में खराबी आ गई थी।
 
कोलकाता आरजी कर लिफ्ट हादसा : सात दिन पहले ही आई थी खराबी, जांच में बड़ा खुलासा

कोलकाता, 25 मार्च (आईएएनएस)। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लिफ्ट में हुई मौत की जांच से पता चला है कि दुखद घटना से ठीक सात दिन पहले उसी लिफ्ट में खराबी आ गई थी।

कोलकाता पुलिस के मुताबिक, ट्रॉमा केयर यूनिट में लिफ्ट में 13 मार्च को तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते इंजीनियरों ने निरीक्षण किया और उसी दिन उसकी मरम्मत भी कर दी।

हालांकि, 20 मार्च को उत्तरी कोलकाता के नागर बाजार के रहने वाले अरूप बनर्जी की एक भयानक हादसे में लिफ्ट और दीवार के बीच दबकर मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि मरम्मत के बाद अस्पताल की वही लिफ्ट महज सात दिनों के भीतर दोबारा खराब कैसे हो गई। फॉरेंसिक टीम ने प्रारंभिक जानकारी पुलिस के साथ साझा कर दी है।

कोलकाता पुलिस के जांचकर्ताओं ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि क्या 13 मार्च को लिफ्ट की मरम्मत ठीक से की गई थी। पता चला है कि 20 मार्च को अरूप बनर्जी अपनी पत्नी सोनाली और छोटे बेटे के साथ ट्रॉमा केयर यूनिट की लिफ्ट नंबर 2 में चढ़े थे, जिसके बाद लिफ्ट में अचानक तेज झटका लगा। पुलिस फिलहाल इस झटके के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

अधिक जानकारी जुटाने के लिए, जांचकर्ताओं ने पीडब्‍ल्‍यूडी विभाग के कर्मचारियों से पूछताछ की जो लिफ्ट के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थे।

इसके अलावा, लिफ्ट इंजीनियरों, रखरखाव एजेंसी के कई कर्मचारियों, आरजी कर कॉम्प्लेक्स के अन्य भवनों (ट्रॉमा केयर यूनिट के अलावा) के लिफ्ट ऑपरेटरों और कई सुरक्षा गार्डों से भी पूछताछ की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के तहत अब तक लगभग 30 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

जांचकर्ताओं ने मृतक अरूप बनर्जी के कई मित्रों और परिचितों से भी बात की, जो दुर्घटनास्थल पर मौजूद थे। घटनाक्रम को समझने के लिए, जांचकर्ता वर्तमान में अस्पताल परिसर में लगे कम से कम 70 कैमरों की सीसीटीवी फुटेज की निगरानी कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरजी कर अस्पताल में अरूप की आकस्मिक मृत्यु की जांच के तहत फोरेंसिक विशेषज्ञों ने लिफ्ट इंजीनियरों के सहयोग से लिफ्ट के कंट्रोल पैनल की जांच की।

जांच के दौरान, फोरेंसिक विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों को पता चला कि इस महीने की शुरुआत में लिफ्ट का नियमित निरीक्षण किया गया था। उस समय, इंजीनियरों ने अस्पताल अधिकारियों को सूचित किया था कि लिफ्ट अच्छी स्थिति में है।

हालांकि, कुछ ही दिनों बाद 13 मार्च को लिफ्ट में खराबी आने लगी। यह बार-बार रुक जाती थी, और इसके सेंसर भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे। लिफ्ट इंजीनियर मौके पर पहुंचे और उन्होंने पाया कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी हो गई थी।

उन्होंने लिफ्ट के मदरबोर्ड की जांच की, यूनिट को अस्थायी रूप से ठीक किया और उसे चालू करने की अनुमति दी। लिफ्ट फिर से सही हो गई। लेकिन, ठीक सात दिन बाद, खराबी फिर शुरू हो गई।

पुलिस को पता चला है कि जब अरूप और उसके परिवार के सदस्य लिफ्ट में दाखिल हुए और दूसरी मंजिल से पांचवीं मंजिल तक जाने के लिए बटन दबाया, तो लिफ्ट सातवीं मंजिल तक चली गई। इसके बाद, लिफ्ट बेसमेंट में उतर गई। इस दौरान, दरवाजे अपने आप बहुत जोर से बंद हो गए, जिससे लिफ्ट के अंदर जोरदार झटका लगा।

जांचकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि लिफ्ट की कथित 'मरम्मत' के महज सात दिन बाद ऐसी खराबी कैसे हो सकती है? विशेष रूप से यह पूछा गया है कि क्या 13 मार्च को की गई मरम्मत अधूरी होने के बावजूद 'ग्रीन सिग्नल' जारी किया गया था।

पुलिस ने बताया कि इस घटना के संबंध में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए फिलहाल फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम