कोयला गैसीकरण योजना के तहत कोई आवेदन न मिलने की रिपोर्ट्स को कोयला मंत्रालय ने किया खारिज
नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। कोयला मंत्रालय ने शनिवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि 37,500 करोड़ रुपए की कोयला गैसीकरण योजना को कोई आवेदन नहीं मिला है।
मंत्रालय ने बताया कि तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने-अपने आवेदन पहले ही जमा कर दिए हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मंत्रालय उन अन्य संभावित आवेदकों के संपर्क में भी है जो प्रोजेक्ट की तैयारी और आवेदन को अंतिम रूप देने के अलग-अलग चरणों में हैं।
पहले राउंड के लिए आवेदन जमा करने की समय-सीमा 7 सितंबर, 2026 है।
बयान में आगे कहा गया कि जब तक एप्लीकेशन विंडो बंद नहीं हो जाती, तब तक पहले राउंड में मिली एप्लीकेशन की संख्या का पक्के तौर पर आकलन या ब्योरा नहीं दिया जा सकता और मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि उससे पहले किया गया कोई भी आकलन अधूरा या अनिर्णायक होगा।
इसके अलावा, कई और आवेदक प्रोजेक्ट की तैयारी के अलग-अलग चरणों में हैं। इस स्कीम का रोलिंग, मल्टी-राउंड एप्लीकेशन डिजाइन नए आवेदकों को बाद के राउंड में आवेदन करने की सुविधा देता है। ये राउंड हर विंडो के बंद होने के अगले दिन खुलते हैं और दो महीने तक खुले रहते हैं।
इस स्कीम के तहत सोचे गए प्रोजेक्ट्स का दायरा बड़ा और जटिल है, इसलिए आवेदकों को काफी तैयारी करनी पड़ती है। इसमें प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करना, टेक्नोलॉजी के विकल्पों का आकलन करना, कोयला/लिग्नाइट और दूसरे फीडस्टॉक के इंतजाम की पहचान करना, प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन करना और प्रोजेक्ट के विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना शामिल है।
बयान में कहा गया है कि जैसे-जैसे डेडलाइन पास आएगी और आवेदक अपने प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर जमा कर सकते हैं।
मंत्रालय ने भरोसा जताया है कि इस स्कीम में इंडस्ट्री की तरफ से अच्छी भागीदारी होगी और इससे लगभग 25 प्रोजेक्ट्स में 2.5 लाख करोड़ रुपए से 3 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश आएगा। साथ ही, इससे करीब 50,000 लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के मौके मिलेंगे।
यह स्कीम सरकार के 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीफिकेशन क्षमता हासिल करने के बड़े लक्ष्य को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
सतह पर कोयला/लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने वाली इस स्कीम को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई, 2026 को मंजूरी दी थी, जिसके लिए कुल 37,500 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। इस स्कीम का मकसद देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन के विकास को तेजी देना और घरेलू कोयले व लिग्नाइट को ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों जैसे सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया में बदलने को बढ़ावा देना है।
--आईएएनएस
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