पाकिस्तान में न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार का खतरा: एफआईडीएच रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 15 जुलाई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार महासंघ (एफआईडीएच) ने कहा कि पाकिस्तान में न्यायिक भ्रष्टाचार अब व्यवस्था के स्तर तक पहुंच चुका है और यह बड़े पैमाने पर होने वाले भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है।
संगठन ने चेतावनी दी कि देश की न्याय व्यवस्था लगातार राजनीतिक दखल और संस्थागत कब्जे के खतरे का सामना कर रही है। एफआईडीएच ने ये बातें अपनी रिपोर्ट ‘अंडर द बेंच: मैपिंग करप्शन रिस्क इन पाकिस्तान जस्टिस सिस्टम’ में कही हैं।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मानवाधिकारों पर गंभीर असर पड़ रहा है। इससे निष्पक्ष सुनवाई और कानून के सामने बराबरी जैसे अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, खासकर गरीब लोगों और अल्पसंख्यक समुदायों को इसका ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यूडिशियरी समेत पाकिस्तान के डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स पर पिछले कई वर्षों से दबाव बढ़ रहा है। इन संस्थाओं को धीरे-धीरे कमजोर किया गया है और कार्यपालिका के प्रभाव में लाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, "इसके साथ ही मौलिक अधिकारों और आजादी पर गंभीर रोक लगाई गई है। दमनकारी कानूनों और मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण स्थिति और खराब हुई है। ऐसे माहौल में न्यायपालिका का इस्तेमाल कार्यकर्ताओं और सरकार के आलोचकों की आवाज दबाने के लिए एक साधन के रूप में किया जाने लगा है।"
एफआईडीएच की यह रिपोर्ट पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था से जुड़े 30 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। इनमें चार महिलाएं भी शामिल थीं। बातचीत करने वालों में वकील, पूर्व और रिटायर्ड जज, पत्रकार और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
डॉन के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के 26वें और 27वें संविधान संशोधन का न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर नकारात्मक असर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, ये बदलाव पाकिस्तान की कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था में एक 'पीछे जाने वाला कदम' हैं, क्योंकि इससे न्यायपालिका की जो थोड़ी बहुत स्वतंत्रता पहले थी, वह भी कमजोर हुई है। इसमें कहा गया है कि अब जजों की नियुक्ति, पीठों (बेंच) का गठन और बड़े मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया में राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की पूरी न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार गहराई तक फैल गया है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता कमजोर हुई है और वह निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों तथा लोगों की बुनियादी आजादियों की रक्षा करने में मुश्किलों का सामना कर रही है।
एफआईडीएच ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले तीन मुख्य कारण बताए हैं। पहला, न्याय व्यवस्था के हर स्तर पर कमजोर प्रशासन, जिसके कारण रिश्वत और भ्रष्ट गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। दूसरा, ऐसी सामाजिक परंपराएं जिनसे पक्षपात और रिश्तेदारी के आधार पर फायदे देने जैसी चीजें बढ़ती हैं। तीसरा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता का कमजोर होना, जिसके कारण संगठन के अनुसार ऊपरी अदालतों तक राज्य के प्रभाव और नियंत्रण की स्थिति बनी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाबदेही से जुड़ी संस्थाएं भी तेजी से राजनीतिक प्रभाव में आ गई हैं और उनका इस्तेमाल भ्रष्टाचार रोकने के बजाय राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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