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सीएमआरएल-एक्जालॉजिक मामला: रेमा के तीखे हमले और चांडी के समर्थन वाले फ्लेक्स बोर्ड से सीएम सतीशन पर बढ़ा दबाव

तिरुवनंतपुरम, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ मामलों को यूडीएफ सरकार की ओर से जिस तरह से संभाला गया है, उस पर निर्दलीय विधायक के.के. रेमा की तीखी आलोचना और कोट्टायम में ओमान चांडी के समर्थन वाले फ्लेक्स बोर्ड लगने की घटनाओं ने इस मुद्दे पर बढ़ते असंतोष को और अधिक उजागर कर दिया है। इससे मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के सामने चुनौतियां बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
 

तिरुवनंतपुरम, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ मामलों को यूडीएफ सरकार की ओर से जिस तरह से संभाला गया है, उस पर निर्दलीय विधायक के.के. रेमा की तीखी आलोचना और कोट्टायम में ओमान चांडी के समर्थन वाले फ्लेक्स बोर्ड लगने की घटनाओं ने इस मुद्दे पर बढ़ते असंतोष को और अधिक उजागर कर दिया है। इससे मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के सामने चुनौतियां बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीना से जुड़े सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में सरकार के कानूनी रुख को लेकर कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान ने जो आपत्तियां उठाई थीं, उन्हें अब यूडीएफ खेमे (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) में समर्थन मिल रहा है।

फेसबुक पर एक तीखी पोस्ट में विधायक रेमा ने विजयन की उस अपील में सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं, जो उन्होंने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस आदेश के खिलाफ दायर की है, जिसमें एफआईआर दर्ज करने और विजिलेंस जांच कराने का निर्देश दिया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सौंपे गए सबूतों की स्वतंत्र जांच कराने के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि बाद में डिवीजन बेंच के सामने सरकारी वकील ने जो रुख अपनाया, वह निराशाजनक था। इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ यूडीएफ के स्टैंड को कमजोर करने का काम हुआ है।

रेमा की ओर से कहा गया है कि सरकार ईडी के इशारे पर काम करने के लिए बाध्य नहीं है लेकिन सबूतों की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस आलोचना को सकारात्मक रूप से ले। रेमा एक निर्दलीय विधायक हैं और उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के समर्थन से चुनाव जीता था।

इस राजनीतिक हलचल की झलक कोट्टायम में भी देखने को मिली, जहां गांधी स्क्वायर और जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय के पास सहित चार जगहों पर फ्लेक्स बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों पर 'विजयन, हम कुछ भी नहीं भूले हैं' और 'भले ही आप भूल जाएं, हम नहीं भूलेंगे' जैसे संदेश लिखे थे। इन बोर्डों के जरिए ओमान चांडी की याद दिलाई गई और उन राजनीतिक लड़ाइयों का जिक्र किया गया, जिनका सामना उन्हें विजयन के नेतृत्व वाली पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान करना पड़ा था।

ये संदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के गुस्से को दर्शाते हैं। उनका सवाल है कि विजयन को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चांडी की तुलना में अधिक रियायत या अनुकूल व्यवहार क्यों मिल रहा है जबकि चांडी को उस समय निशाना बनाया गया था।

इससे पहले मैथ्यू कुझालनदान ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया था कि कैसे ओमान चांडी को जस्टिस जी. शिवराजन आयोग के सामने पेश होना पड़ा था और उन्हें किन राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ा था। उनके हस्तक्षेप से इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर खुली बहस शुरू करने में मदद मिली है।

हालांकि, पूर्व सीएम चांडी के बेटे और पुथुपल्ली के विधायक चांडी ओमान ने संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि उनके पिता के साथ जो अन्याय हुआ है, उसका इस्तेमाल किसी और को परेशान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

ऐसे में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की चुनौती बढ़ गई है। उनके सामने चुनौती यह है कि वे सरकार के उस रुख का बचाव करें जिसमें एक स्वतंत्र और कानूनी रूप से ठोस जांच की मांग की गई है और साथ ही कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती बेचैनी को भी दूर करें।

पूर्व सीएम विजयन को शुक्रवार को कोच्चि में ईडी के दफ्तर में पेश होने के लिए कहा गया है। वहीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर में विजयन को पहला आरोपी बनाया गया है।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम