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कर्नाटक की श्रींगेरी सीट पर पुनर्गणना पूरी, कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा फिर विजयी घोषित

चिक्कमगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक की चर्चित श्रींगेरी विधानसभा सीट पर डाक मतपत्रों की पुनर्गणना शनिवार को पूरी हो गई, जिसमें कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा को एक बार फिर विजेता घोषित किया गया।
 
कर्नाटक की श्रींगेरी सीट पर पुनर्गणना पूरी, कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा फिर विजयी घोषित

चिक्कमगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक की चर्चित श्रींगेरी विधानसभा सीट पर डाक मतपत्रों की पुनर्गणना शनिवार को पूरी हो गई, जिसमें कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा को एक बार फिर विजेता घोषित किया गया।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस सीट पर डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती का आदेश दिया था। पुनर्गणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजेगौड़ा ने फिर से जीत दर्ज की।

फैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए राजेगौड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट ने पोस्टल बैलेट की पुनर्गणना का आदेश दिया था।

उन्होंने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि मैं चाहता था कि सच सामने आए। आज मैं फिर जीत गया हूं और मेरे समर्थकों के पास जश्न मनाने का कारण है। लगातार मेरे खिलाफ आरोप लगाए गए, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई।”

राजेगौड़ा ने कहा, “मैं मतगणना के दौरान मौजूद नहीं था। 2023 में जीत की घोषणा के बाद ही मैं मौके पर पहुंचा था। मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए, अयोग्यता की मांग की गई और पुनर्गणना की मांग उठाई गई। अदालत ने सभी आरोप खारिज कर दिए और दोबारा गिनती का आदेश दिया। सरकार ने इस प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए, जिसकी भरपाई उनसे की जानी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि 13 साल के राजनीतिक करियर में उन्हें इस क्षेत्र के विकास के लिए केवल करीब एक साल काम करने का मौका मिला, बाकी समय विपक्ष विकास कार्यों में बाधाएं डालता रहा।

राजेगौड़ा की जीत के बाद चिक्कमगलुरु के आईडीएसजी कॉलेज के सामने समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया। समर्थकों ने नारे लगाए, फूल बरसाए और खुशी जाहिर की।

श्रींगेरी सीट 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान काफी चर्चा में रही थी। उस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार डी.एन. जीवराज कांग्रेस प्रत्याशी टी.डी. राजेगौड़ा से महज 201 वोटों से हार गए थे।

चुनाव में कुल 1,822 डाक मतपत्र डाले गए थे, जिनमें से 279 वोट खारिज कर दिए गए थे। परिणाम से असंतुष्ट जीवराज ने पुनर्गणना की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस पर विचार नहीं किया और राजेगौड़ा को विजेता घोषित कर दिया था। इसके बाद जीवराज हाईकोर्ट पहुंचे थे।

पुनर्गणना के दौरान उस समय भ्रम की स्थिति बन गई, जब खारिज किए गए 279 मतपत्रों में से केवल 270 ही मिले। बाकी नौ मतपत्र लापता थे, जिन्हें अधिकारियों ने गहन खोजबीन के बाद बरामद किया।

सुबह से अधिकारी इन नौ लापता मतपत्रों की तलाश में जुटे थे। इन्हें ढूंढने में हुई देरी के कारण पुनर्गणना प्रक्रिया तय समय से काफी देर तक चली।

--आईएएनएस

डीएससी