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टीएमसी के बागी गुट का चुनाव चिह्न पर दावा, गुरुवार को ईसीआई की फुल बेंच से होगी मुलाकात

कोलकाता, 1 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला पार्टी का "बागी लेकिन बहुमत" गुट गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय में आयोग की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) से मुलाकात करेगा। इस दौरान बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न (लोगो) और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा।
 

कोलकाता, 1 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला पार्टी का "बागी लेकिन बहुमत" गुट गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय में आयोग की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) से मुलाकात करेगा। इस दौरान बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न (लोगो) और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा।

बागी गुट ने पहले इस मामले में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलने का समय मांगा था। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि आयोग ने गुरुवार को बैठक का समय तय किया है, जिसमें उनके गुट की दलीलें सुनी जाएंगी।

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम नई दिल्ली के लिए रवाना होगा और गुरुवार को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेगा।

इससे पहले 22 जून को तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और 10 सदस्यीय उप-समिति का गठन किया था। नई कार्यसमिति में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके बाद पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया। बागी गुट की ओर से वकीलों की एक टीम पहले ही सभी प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज निर्वाचन आयोग के समक्ष जमा करा चुकी है।

वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं। बागी गुट का दावा है कि इनमें से 60 विधायक उसके साथ हैं, जबकि 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान "मूल लेकिन अल्पमत" गुट के साथ हैं।

इस पूरे विवाद का मुख्य कानूनी मुद्दा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर नियंत्रण को लेकर है। निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए कम से कम छह प्रतिशत वैध मत और कम से कम दो विधायक होने आवश्यक हैं।

बागी गुट का दावा है कि उसके साथ 60 से अधिक विधायक हैं। यदि प्रति विधायक औसतन 80 हजार वोट भी माने जाएं तो उनके पक्ष में लगभग 48 लाख वोट बैठते हैं, जो निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित छह प्रतिशत यानी करीब 37.80 लाख वोट की सीमा से काफी अधिक हैं।

वहीं, बागी गुट का कहना है कि "मूल लेकिन अल्पमत" गुट के पास केवल 20 विधायक हैं, इसलिए उनके हिस्से के वोट 37 लाख के आंकड़े तक नहीं पहुंचते। इसी आधार पर विद्रोही गुट का दावा है कि चुनाव चिह्न पर उसका दावा अधिक मजबूत है।

--आईएएनएस

डीएससी