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आरबीआई की नीतिगत स्थिरता और बेहतर विकास-महंगाई अनुमान से अर्थव्यवस्था पर बढ़ा भरोसा: उद्योग जगत

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उद्योग जगत के नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने और तटस्थ (न्यूट्रल) नीतिगत रुख बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि यह कदम नीतिगत स्थिरता प्रदान करता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में केंद्रीय बैंक के विश्वास को दर्शाता है।
 

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उद्योग जगत के नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने और तटस्थ (न्यूट्रल) नीतिगत रुख बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि यह कदम नीतिगत स्थिरता प्रदान करता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में केंद्रीय बैंक के विश्वास को दर्शाता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा। साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच मौजूदा नीतिगत रुख में भी कोई बदलाव नहीं किया।

आरबीआई के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एस्सार समूह के ग्रुप मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) डी. मुथुकुमारन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के अनुमान में की गई बढ़ोतरी अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच भारत की मजबूत आर्थिक क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा, "वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आरबीआई द्वारा जीडीपी वृद्धि अनुमान बढ़ाया जाना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की सकारात्मक पुष्टि है। वहीं, महंगाई के दबाव के बीच भी निवेश चक्र के दौरान रेपो रेट को स्थिर रखना कारोबारी जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत स्थिरता प्रदान करता है।"

मुथुकुमारन ने आगे कहा कि बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) और लंबे समय में परिणाम देने वाले अन्य क्षेत्रों के लिए पूंजी की स्थिर लागत उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितना कि विकास को समर्थन देने के लिए सरकार का निरंतर निवेश।

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एचडीएफसी एएमसी) में फिक्स्ड इनकम विभाग के प्रमुख अनिल बंबोली ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा और यह मौजूदा परिस्थितियों में एक संतुलित एवं विवेकपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, "आगे की स्थिति को देखते हुए, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, स्थिर घरेलू आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई के बीच एमपीसी का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला पूरी तरह उपयुक्त प्रतीत होता है।"

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति को आरबीआई की वर्तमान रणनीति की "शांत पुष्टि" बताया।

उन्होंने कहा, "वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में समय-समय पर दिखाई देने वाली नरमी के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7 प्रतिशत का संशोधित वृद्धि अनुमान इस बात का संकेत देता है कि आर्थिक सुधार अब कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर फैल रहा है।"

डॉ. शर्मा ने कहा, "जीडीपी वृद्धि अनुमान में यह बढ़ोतरी भले ही सीमित हो, लेकिन यह सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) की निरंतरता, हालिया चुनौतियों के बाद निर्यात क्षेत्र में स्थिरता और सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों को भी स्वीकार करती है।"

--आईएएनएस

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