Aapka Rajasthan

वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए पहुंची

मुंबई, 29 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। घरेलू निवेश, सोने की होल्डिंग और विदेशी निवेश में तेज वृद्धि के चलते आरबीआई की बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए (31 मार्च 2026 तक) हो गई। यह जानकारी शुक्रवार को जारी की गई।
 
वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए पहुंची

मुंबई, 29 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। घरेलू निवेश, सोने की होल्डिंग और विदेशी निवेश में तेज वृद्धि के चलते आरबीआई की बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए (31 मार्च 2026 तक) हो गई। यह जानकारी शुक्रवार को जारी की गई।

आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के दौरान आरबीआई की बैलेंस शीट में 15.72 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई, जो एक वर्ष पहले के 76.25 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 91.97 लाख करोड़ रुपए हो गई।

यह वृद्धि वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कहीं अधिक रही। वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 26.4 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह विस्तार लिक्विडिटी ऑपरेशंस, रिजर्व मैनेजमेंट और आरबीआई की परिसंपत्तियों की संरचना में बदलाव के प्रभाव को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में घरेलू निवेश 44.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सोने की होल्डिंग में 63.8 प्रतिशत और विदेशी निवेश में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

31 मार्च 2026 तक आरबीआई की कुल परिसंपत्तियों में घरेलू परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 29.1 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 25.7 प्रतिशत थी।

वहीं, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, गोल्ड होल्डिंग और भारत के बाहर वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण कुल परिसंपत्तियों का 70.9 प्रतिशत रहे, जबकि पिछले साल यह हिस्सा 74.3 प्रतिशत था। इससे साफ है कि वित्त वर्ष 2026 में घरेलू परिसंपत्तियों की वृद्धि विदेशी परिसंपत्तियों की तुलना में तेज रही।

देनदारियों की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 के दौरान पुनर्मूल्यांकन खाते, जारी नोट, जमा राशि और अन्य देनदारियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आरबीआई ने बताया कि पुनर्मूल्यांकन खाते 63.4 प्रतिशत बढ़े, जबकि जारी नोटों में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जमा राशि 11.6 प्रतिशत बढ़ी और अन्य देनदारियां 21.1 प्रतिशत बढ़ीं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई की बैलेंस शीट लगातार बढ़ती रही है। वित्त वर्ष 2023 के अंत में यह 63.45 लाख करोड़ रुपए थी, जो वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर 70.47 लाख करोड़ रुपए हुई। वित्त वर्ष 2025 में यह 76.25 लाख करोड़ रुपए पहुंची और अब वित्त वर्ष 2026 में 91.97 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान 1.09 लाख करोड़ रुपए कंटिजेंसी फंड (आकस्मिक निधि) में ट्रांसफर किए। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह प्रावधान उसके इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के तहत किया गया है। हालांकि, इस साल एसेट डेवलपमेंट फंड में कोई राशि ट्रांसफर नहीं की गई।

आरबीआई ने कहा, "1,09,379.64 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया और इसे कंटिजेंसी फंड में ट्रांसफर किया गया।" रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क कंटिजेंट रिस्क बफर को बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बनाए रखने की अनुमति देता है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड करीब 2.87 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड देने की घोषणा भी की है। इससे सरकार को पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

डीबीपी