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आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट को रख सकता है स्थिर, आउटलुक और आक्रामक होने की उम्मीद : एचएसबीसी

नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाली जून मौद्रिक नीति कमेटी (एमसीसी) में रेपो रेट को स्थिर रख सकता है। वहीं, कमजोर रुपया और कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई में इजाफा होने की संभावना के चलते आउटलुक और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है। यह बयान एचएसबीसी में एक अर्थशास्त्री की ओर से दिया गया।
 
आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट को रख सकता है स्थिर, आउटलुक और आक्रामक होने की उम्मीद : एचएसबीसी

नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाली जून मौद्रिक नीति कमेटी (एमसीसी) में रेपो रेट को स्थिर रख सकता है। वहीं, कमजोर रुपया और कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई में इजाफा होने की संभावना के चलते आउटलुक और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है। यह बयान एचएसबीसी में एक अर्थशास्त्री की ओर से दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट और मैक्रो स्ट्रैटजिस्ट प्रांजुल भंडारी का कहा कि इस मौद्रिक नीति में आरबीआई का महंगाई और अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर आने वाला अनुमान बताएगा कि नीति निर्माता कैसे इस ऊर्जा संकट को देख रहे हैं।

पिछले रिव्यू में केंद्रीय बैंक ने तेल की आधारभूत कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल और वैकल्पिक परिदृश्य के रूप में 95 डॉलर का उपयोग किया था।

एचएसबीसी की अर्थशास्त्री का मानना ​​है कि तेल की ऊंची कीमतों का अनुमान अब आरबीआई का आधार होगा, जिससे महंगाई का अनुमान पहले के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से बढ़कर 5 प्रतिशत के करीब पहुंच जाएगा।

भंडारी ने कहा, "महंगाई बढ़ रही है, जो ब्याज दरों में वृद्धि का समर्थन करती है, जबकि विकास धीमा हो रहा है, जो ब्याज दरों में वृद्धि के खिलाफ तर्क देता है।"

उन्होंने इसे "किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए सबसे कठिन स्थिति" भी बताया।

उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की ऊंची कीमतें और संभावित अल नीनो डेवलपमेंट, महंगाई नियंत्रण, राजकोषीय घाटे और चालू खाते के लिए बाधा बन सकते हैं।

केयरएज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और हाल ही में खुदरा ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थोक महंगाई में तीव्र वृद्धि से उपभोक्ता कीमतों पर इसका प्रभाव के तेजी से बढ़ने का खतरा है। महंगाई में मौजूदा उछाल आपूर्ति में अचानक आई कमी के कारण है, न कि मांग में वृद्धि के कारण।

रिपोर्ट में कच्चे तेल की औसत कीमत 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल मानते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल होने से वृद्धि दर घटकर 6 प्रतिशत के करीब आ सकती है।

--आईएएनएस

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