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राज पंचायत चुनाव: रिजर्वेशन लॉटरी टली, प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई तारीखें तय होंगी

जयपुर, 15 सितंबर (आईएएनएस)। राजस्थान पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज चुनावों के लिए रिजर्वेशन लॉटरी को टाल दिया है, जो 17 और 18 सितंबर को होनी थी।
 

जयपुर, 15 सितंबर (आईएएनएस)। राजस्थान पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज चुनावों के लिए रिजर्वेशन लॉटरी को टाल दिया है, जो 17 और 18 सितंबर को होनी थी।

शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया (जिसमें चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव भी शामिल है) पूरी होने के बाद नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा।

पंचायती राज विभाग ने राज्य चुनाव आयोग को बताया कि 17 और 18 सितंबर को होने वाली लॉटरी पहले बताई गई तारीखों पर नहीं होगी। इसकी वजह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी चल रही प्रक्रिया है।

जिला कलेक्टर और दूसरे सीनियर अधिकारी अभी चुनाव से जुड़े कामों में लगे हैं, इसलिए पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया एक साथ करना मुश्किल हो रहा है।

पुराने शेड्यूल के मुताबिक, जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी 17 सितंबर को होनी थी। अगले दिन, यानी 18 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी होनी थी।

यह लॉटरी बहुत जरूरी है क्योंकि इससे अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों और पदों के आरक्षण का स्टेटस तय होगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और लागू होने वाली दूसरी श्रेणियों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं।

लॉटरी टलने की वजह से संभावित उम्मीदवारों को यह जानने के लिए और इंतजार करना होगा कि उनकी सीट खुली रहेगी या आरक्षित श्रेणी में आएगी।

राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए संदेश के अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरक्षण लॉटरी का नया शेड्यूल तय किया जाएगा।

इसका मतलब है कि पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब राज्य शहरी निकाय चुनावों के बाकी चरण पूरे कर लेगा।

इसलिए, यह देरी मुख्य रूप से एक प्रशासनिक फैसला है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि जिला-स्तर के अधिकारी अगली बड़ी चुनावी प्रक्रिया शुरू करने से पहले चुनाव से जुड़ी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां पूरी कर सकें।

पंचायती राज चुनावों से पहले आरक्षण लॉटरी सबसे अहम पड़ावों में से एक है। जब तक लॉटरी पूरी नहीं हो जाती, तब तक जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों जैसे पदों के लिए आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होगी।

नतीजतन, इस देरी की वजह से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों और स्थानीय नेताओं को अपनी चुनावी योजनाएं तय करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

आरक्षण सूची जारी होने के बाद उम्मीद है कि संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियां तेज कर देंगी, उम्मीदवारों की पहचान करेंगी और स्थानीय स्तर पर प्रचार शुरू कर देंगी।

राजस्थान का चुनावी कैलेंडर अब स्थानीय निकाय के एक बड़े चुनाव से दूसरे चुनाव की ओर बढ़ रहा है।

अभी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पूरे किए जा रहे हैं, और उम्मीद है कि शहरी निकाय चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद पंचायती राज चुनावों की तैयारियां तेज हो जाएंगी।

हालांकि, अभी के लिए राजनीतिक कैलेंडर में आरक्षण लॉटरी अगली अहम तारीख बन गई है। नई तारीखों से यह तय होगा कि चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार कब जान पाएंगे कि उनकी स्थिति क्या है और राजस्थान की अगली बड़ी जमीनी चुनावी लड़ाई कब पूरी तरह से प्रचार के दौर में प्रवेश कर पाएगी।

--आईएएनएस

डीकेपी/