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राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री संविधान का मज़ाक उड़ा रहे हैं: केटीआर

हैदराबाद, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर संविधान का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया।
 
राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री संविधान का मज़ाक उड़ा रहे हैं: केटीआर

हैदराबाद, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर संविधान का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया।

तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार द्वारा कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के दो विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिकाओं को खारिज किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केटीआर ने कहा कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी खुले तौर पर दलबदल करने वाले विधायकों का “बेशर्मी से” बचाव कर रहे हैं।

बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी हर कदम पर संविधान को कमजोर कर रहे हैं और उसका उपहास बना रहे हैं।

केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कांग्रेस पार्टी ने दलबदल करने वाले विधायक काले यादवैया और पोचाराम श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए राजनीतिक दबाव डालकर विधानसभा अध्यक्ष के पद को भ्रष्ट किया है। इससे कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी नैतिक दिवालियापन को उजागर किया है। वही अलोकतांत्रिक ताकतें, जिन्होंने पहले पांच दलबदलू विधायकों के खिलाफ कार्रवाई रोकी थी, आज फिर पूरी तरह से संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रख रही हैं।”

उन्होंने कहा, “आंखों के सामने दलबदल के लाखों सबूत होने के बावजूद सबूत न होने की बात करना पवित्र विधानसभा का अपमान है।” यह टिप्पणी उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के उस बयान पर की, जिसमें कहा गया था कि विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है।

केटीआर ने आगे कहा, “यह एक बार फिर साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी को न केवल संविधान का, बल्कि सर्वोच्च न्यायालयों का भी कोई सम्मान नहीं है। आज का फैसला यह स्पष्ट करता है कि सत्तारूढ़ पार्टी दलबदलू विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव का सामना करने से घबराई हुई है, खासकर तब जब पंचायत चुनावों में जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।”

उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी चाहे जितनी बार दलबदलू विधायकों को बचाने की कोशिश करे, इसका कोई फायदा नहीं होगा। जनमत की अदालत में वे पहले ही ‘पूर्व’ विधायक बन चुके हैं। यह कांग्रेस पार्टी की मूर्खता का प्रमाण है। बीआरएस अपनी लड़ाई तब तक जारी रखेगी, जब तक जनता के फैसले का अपमान करने वालों और उन विधायकों को घर-घर जाकर कांग्रेस का दुपट्टा पहनाने वाले मुख्यमंत्री को सबक नहीं सिखाया जाता।”

गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने गुरुवार को कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के दो विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिकाएं खारिज कर दीं। अब तक कांग्रेस में कथित रूप से शामिल हुए 10 में से 7 बीआरएस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं।

पिछले महीने अध्यक्ष ने पांच विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं खारिज की थीं। आठ विधायकों के मामलों की सुनवाई पूरी कर नवंबर में आदेश सुरक्षित रखे गए थे। अभी एक विधायक के मामले में फैसला आना बाकी है, जबकि दो अन्य विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होना शेष है।

--आईएएनएस

डीएससी