राहुल गांधी ने सीबीएसई के ओएसएम के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप लगाए
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग स्कीम' (ओएसएम) के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों के नए आरोप लगाए। उन्होंने इस काम के लिए एडटेक कंपनी को चुनने के फैसले की न्यायिक जांच की मांग की।
सोशल मीडिया पर एक न्यूज क्लिप शेयर करते हुए गांधी ने इस मुद्दे को उठाने के लिए भाजपा मंत्रियों द्वारा उन पर किए गए हमलों का जवाब दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया।
इस पोस्ट में, जो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 12वीं क्लास के सीबीएसई मूल्यांकन सिस्टम में आई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेने के एक दिन बाद आया, कांग्रेस नेता ने यह इशारा किया कि ओएसएम का कॉन्ट्रैक्ट दिया ही नहीं गया था।
सरकार पर इस साल से ओएसएम सिस्टम लागू करने में अनावश्यक जल्दबाजी दिखाने का आरोप लगाते हुए गांधी ने दावा किया कि टीसीएस के बजाय कोएम्प्ट नाम की एक कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था और उस कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए कई शर्तों में ढील दी गई थी।
गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीबीएसई कहते हैं कि सही प्रक्रिया का पालन किया गया। यह कोई जवाब नहीं है, यह कोई जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या कॉन्ट्रैक्ट ईमानदारी से उस सबसे अच्छी कंपनी को दिया गया था जो यह काम सही तरीके से कर सकती थी। 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो नियमों में बदलाव किए जाने के बाद ही योग्य साबित हो पाई।
राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा मंत्री मुझसे सवाल पूछने के लिए मुझ पर हमला कर रहे हैं कि मैंने पहले दिन से ही एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। इस जांच का दायरा सीबीएसई से बढ़ाकर कोएम्प्ट को दिए गए हर कॉन्ट्रैक्ट तक किया जाना चाहिए। हमारे युवाओं को सच जानने का हक है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कुछ छात्रों के मामले में गड़बड़ियों की बात स्वीकार की है और सिस्टम में सुधार करने का वादा किया है।
12वीं क्लास के एक छात्र का मामला, जिसे गलती से किसी दूसरे उम्मीदवार की भौतिक विज्ञान की आंसर शीट भेज दी गई थी, डिजिटल मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर देशव्यापी बहस का कारण बन गया, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा हो गईं।
अपने बचाव में सीबीएसई ने बुधवार को गांधी के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने एक खास शिक्षा टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ किए गए कॉन्ट्रैक्ट में किसी भी तरह की अनियमितता की बात कही थी।
सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये आरोप गलत और भ्रामक हैं और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
बोर्ड ने कहा कि सीबीएसई ने इस एजेंसी को कॉन्ट्रैक्ट देते समय 'सामान्य वित्तीय नियम' के प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया है। सीबीएसई ने 28 अगस्त, 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षाओं 2026 की आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया था और यह कॉन्ट्रैक्ट उस बोली लगाने वाली कंपनी को दिया गया जो इसके लिए योग्य थी।
--आईएएनएस
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