राहुल गांधी वोटर लिस्ट से कल्याणकारी योजनाओं को जोड़ने का कर रहे विरोध, कर्नाटक में समान फैसले पर चुप्पी: बोम्मई
बेंगलुरु, 7 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी केंद्र सरकार की ओर से कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को मतदाता सूची से जोड़ने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस शासित कर्नाटक में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की घोषणा पर चुप्पी साधे हुए हैं।
बोम्मई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने केवल इस संभावना पर बात की थी कि कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन को मतदाता सूची में उनके नाम से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया था। इसके बावजूद राहुल गांधी ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
भाजपा सांसद ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी राज्य में इसी तरह का प्रस्ताव घोषित किया है। इसके तहत राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों को देने की बात कही गई है, जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।
बोम्मई ने कहा, "दुर्भाग्य से राहुल गांधी अपने ही राज्य में हो रही घटनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं और केवल केंद्र की आलोचना करने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक ही मुद्दे पर केंद्र और अपनी पार्टी की सरकार वाले राज्य के लिए अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। बोम्मई के मुताबिक, ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां राहुल गांधी केंद्र से जिस व्यवस्था को लागू नहीं करने की अपेक्षा करते हैं, वही व्यवस्था उनके अपने राज्य में पहले से लागू की जा रही है।
उन्होंने राहुल गांधी के इस रवैये को निंदनीय बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केंद्र को निशाना बनाने के लिए चुनिंदा मुद्दे उठा रहे हैं, जबकि कर्नाटक में समान फैसलों की अनदेखी कर रहे हैं।
दरअसल, केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने हाल ही में कहा था कि उनके मंत्रालय की योजनाओं के तहत लाभार्थियों की पहचान और भुगतान की प्रक्रिया में केवल आधार कार्ड पर निर्भर रहने के बजाय वोटर आईडी (ईपीआईसी) नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं।
जन योजना अभियान/पीपुल्स प्लान कैंपेन पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मंत्री ने कहा था कि लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार अब एकमात्र आधार नहीं होगा। उन्होंने दावा किया था कि आधार कार्ड आसानी से बन जाते हैं, इसलिए लाभार्थियों के सत्यापन के लिए ईपीआईसी नंबर और बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी।
विपक्ष ने इसे एक साजिश करार देते हुए आशंका जताई थी कि कल्याणकारी योजनाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर लाखों लोग सरकारी लाभ से वंचित हो सकते हैं। इनमें विशेष रूप से वे लोग शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनके नामों पर आपत्ति दर्ज की गई है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाला बताया था। उन्होंने कहा था कि हर प्रशासनिक बदलाव को एसआईआर से जोड़ना गलत है। मंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और बिचौलियों के जरिए होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है।
--आईएएनएस
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