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पंजाब के किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन की 21,019 मशीनें खरीदीं

चंडीगढ़, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब ने पराली जलाने को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। किसानों ने चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) की 21,019 मशीनें खरीदी हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार को बताया कि सुपर सीडर किसानों के बीच सबसे पसंदीदा उपकरण बनकर उभरा है।
 

चंडीगढ़, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब ने पराली जलाने को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। किसानों ने चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) की 21,019 मशीनें खरीदी हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार को बताया कि सुपर सीडर किसानों के बीच सबसे पसंदीदा उपकरण बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी के साथ बड़े पैमाने पर हुई यह खरीद, फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति राज्य के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।

सुपर सीडर पांच सबसे लोकप्रिय मशीनों की सूची में शीर्ष पर रहा, जिसकी 14,274 इकाइयां किसानों ने खरीदीं। इसके बाद मल्चर का स्थान रहा, जिसकी 1,721 इकाइयां खरीदी गईं, और हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी हल का स्थान रहा, जिसकी 1,346 इकाइयां खरीदी गईं। जीरो टिल ड्रिल और बेलिंग मशीन क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहीं, जिनकी बिक्री 1,123 और 927 यूनिट्स रही। मंत्री ने आगे बताया कि पुआल रेक की भी काफी मांग रही और 874 यूनिट्स खरीदी गईं।

राज्य सरकार की सब्सिडी सहायता को सीआरएम उपकरणों के बढ़ते उपयोग का श्रेय देते हुए खुदियां ने कहा कि व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां और पंचायतें 80 प्रतिशत सब्सिडी के लिए पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों को 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपए की एक व्यापक कार्य योजना का समर्थन प्राप्त है। इन पहलों के परिणामस्वरूप पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी आई है, जो लगभग 90 प्रतिशत तक गिरकर 2022 में 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। इस प्रगति के कारण पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन रणनीति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

खुदियां ने कहा कि पर्याप्त सब्सिडी और व्यापक जागरूकता अभियानों ने किसानों को फसल अवशेषों को बोझ के बजाय एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया है।

मंत्री ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के पर्यावरणीय और कृषि लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुपर सीडर और जीरो-टिल ड्रिल किसानों को धान के अवशेषों में सीधे गेहूं बोने में सक्षम बनाते हैं। इससे समय की बचत होती है और मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है, साथ ही फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता भी कम हो जाती है।

इसके अलावा, बेलर और रेक बिजली उत्पादन और पशु चारे जैसे उद्देश्यों के लिए पराली के संग्रहण और उपयोग में सहायक होते हैं।

भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए खुदियां ने कहा कि राज्य सरकार कृषि समुदाय का समर्थन करने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

--आईएएनएस

एमएस/