पुणे पुलिस प्रमुख ने सुप्रिया सुले के 'अपराध की राजधानी' वाले आरोप का डेटा के साथ जवाब दिया
पुणे, 2 जून (आईएएनएस)। पुणे में शहर की अपराध स्थिति को लेकर राजनीतिक नेताओं और पुलिस के बीच एक सार्वजनिक विवाद छिड़ गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने पुणे को 'अपराधियों की राजधानी' करार दिया और मांग की कि पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार को अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया जाए।
सुले के आरोपों का जवाब देते हुए, पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने 9 पन्नों का एक विस्तृत पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने हर आरोप का बिंदुवार खंडन किया। इस पत्र में, कुमार ने अपने इस दावे के समर्थन में आधिकारिक आंकड़े पेश किए कि शहर में अपराध दर में लगातार गिरावट आई है।
यह राजनीतिक विवाद पुणे में हाल ही में हुई अवैध शराब त्रासदी के बाद खड़ा हुआ, जिसमें 21 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद, सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
उनके आरोपों का जवाब देते हुए, कमिश्नर अमितेश कुमार ने लिखा, "हम हमेशा रचनात्मक आलोचना का स्वागत करते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर गलत आंकड़े प्रसारित करने से नागरिकों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा होता है, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते हैं। इससे शहर की बदनामी होती है और पुलिस बल का मनोबल गिरता है।"
उन्होंने आगे सभी से अपील की कि वे पुणे की पहचान को एक "आईटी और शिक्षा केंद्र" के रूप में बनाए रखने के लिए पुलिस बल का मार्गदर्शन करें और उनका समर्थन करें।
1 जनवरी से 27 मई, 2026 के बीच की अवधि के आंकड़ों का हवाला देते हुए, कमिश्नर ने दावा किया कि अपराध की प्रमुख श्रेणियों में काफी गिरावट आई है, जिनमें चेन स्नैचिंग (56 प्रतिशत), लूट (36 प्रतिशत), वाहन चोरी (28 प्रतिशत), हत्या का प्रयास (27 प्रतिशत), सेंधमारी (14 प्रतिशत), वाहनों में तोड़फोड़ (50 प्रतिशत से अधिक), और हत्या (10.5 प्रतिशत) शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में हुई हत्या की दस घटनाओं में से छह घरेलू विवादों से जुड़ी थीं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रैंकिंग का हवाला देते हुए, कमिश्नर ने बताया कि संज्ञेय अपराधों के मामले में भारत के 19 प्रमुख महानगरों में पुणे 18वें स्थान पर है, जो इसे देश के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक बनाता है। उन्होंने इसका श्रेय पिछले दो वर्षों में उठाए गए कड़े कदमों को दिया।
उन्होंने कहा, "200 मामलों में 1,000 से अधिक अपराधियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की गई है। लगभग 250 व्यक्तियों के खिलाफ महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियां निवारण अधिनियम (एमपीडीए) के तहत मामला दर्ज किया गया, और 500 अपराधियों को शहर की सीमा से बाहर (तड़ीपार) कर दिया गया। पिछले दो वर्षों में 20 करोड़ रुपए की नशीली दवाएं जब्त की गईं; और 2024 में 3,700 करोड़ रुपये के एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया गया।"
कुमार ने माना कि अपराध बढ़ने की धारणा मई में 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट की गई पांच बड़ी घटनाओं के कारण बनी थी, लेकिन उन्होंने कहा कि गश्त तुरंत बढ़ा दी गई थी। उन्होंने बकरी ईद से पहले 'लॉकडाउन' की अफवाहों को भी खारिज कर दिया, और स्पष्ट किया कि पाबंदियां रात 10 बजे के बाद केवल अस्थायी स्टॉलों और सड़क किनारे के विक्रेताओं पर लागू होती हैं, जबकि लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
--आईएएनएस
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