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भारत में लड़कियों की तरक्की का असर देश की सीमाओं से कहीं आगे तक है : यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूनिसेफ की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हनान सुलेमान ने भारत में लड़कियों के सशक्तीकरण की स्थिति में हुए सुधार की तारीफ की है और कहा है कि इसका सकारात्मक असर वैश्विक स्तर पर भी होगा।
 

संयुक्त राष्ट्र, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूनिसेफ की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हनान सुलेमान ने भारत में लड़कियों के सशक्तीकरण की स्थिति में हुए सुधार की तारीफ की है और कहा है कि इसका सकारात्मक असर वैश्विक स्तर पर भी होगा।

हनान सुलेमान ने कहा, "पिछले एक दशक में भारत में लड़कियों की शिक्षा में काफी सुधार हुआ है, जो परिवारों में लड़कियों के महत्व को बढ़ती मान्यता को दर्शाता है।"

उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी है। भारत में 25 करोड़ 30 लाख किशोर हैं और इसका मतलब है कि भारत में लड़कियों के लिए हुई प्रगति का महत्व उसकी सीमाओं से कहीं आगे तक है।

हनान सुलेमान भारत और सिएरा लियोन द्वारा अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लगातार निवेश, बड़े पैमाने पर सामुदायिक भागीदारी और नीतिगत कार्रवाई से वास्तविक और सार्थक बदलाव लाया जा सकता है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए भारत के कई कार्यक्रमों ने जीवन भर अपना असर दिखाया है। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में महिलाओं की प्रगति का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा, "जब मैं कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र था, तो मेरी क्लास में कोई लड़की नहीं थी। यह पूरी तरह से लड़कों की क्लास थी क्योंकि इसे पुरुषों का विषय माना जाता था, लेकिन आज मेरी यूनिवर्सिटी में लगभग 70 प्रतिशत क्लास में लड़कियां हैं। इसलिए यह हमारे ही जीवनकाल में वास्तविक प्रगति है।"

हालांकि उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में अभी भी पुरुषों का दबदबा है। हम सिर्फ टेक ब्रदर्स के बारे में सुनते हैं, टेक सिस्टर्स के बारे में नहीं सुनते।

उन्होंने कहा कि एआई की ताकत को देखते हुए सभी सदस्य देशों को इस पर ध्यान देना चाहिए ताकि एआई का क्षेत्र लड़कियों और महिलाओं के अनुकूल बने। भारत में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि डिजिटल टूल्स, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है, लड़कियों की शिक्षा के लिए मददगार साबित हों। एआई का इस्तेमाल अब खास ट्यूटोरियल और बच्चों के लिए पढ़ाई की सामग्री बनाने में हो रहा है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

सिएरा लियोन की उप विदेश मंत्री जेनेबा बंगुरा ने कहा कि लड़कियों को सशक्त बनाने में किया गया निवेश समाज और देश के लिए कई गुना सकारात्मक असर डालता है।

उन्होंने कहा कि जब हम एक लड़की की तरक्की में जब हम निवेश करते हैं, तो हम परिवारों, समुदायों और राष्ट्रों को मजबूत करते हैं और एक अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध दुनिया बनाते हैं। अफ्रीका और दुनिया भर में लड़कियां सिर्फ कमजोर नहीं हैं, बल्कि वे बदलाव लाने वाली, इनोवेटर, लीडर और विकास लाने वाली हैं।

लाइबेरिया के स्थायी प्रतिनिधि लुईस ब्राउन ने 1989 से 2003 के बीच गृह युद्ध खत्म करने में महिलाओं की भूमिका को याद किया। अल्जीरिया के स्थायी प्रतिनिधि अमर बेंदजामा ने कहा कि आज हम लड़कियों के लिए जो माहौल बनाते हैं, वह उनके कल के योगदान को तय करता है। लड़कियों के अधिकारों और अवसरों में निवेश हमारे साझा भविष्य में निवेश है। उन्होंने भी लड़कियों के लिए डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस