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पश्चिम बंगाल: पुस्तक खरीद में कथित अनियमितताओं की होगी जांच, तृणमूल शासनकाल के फैसले जांच के दायरे में

कोलकाता, 16 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासनकाल के दौरान सरकारी पुस्तकालयों और सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए पुस्तकों की खरीद में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है।
 

कोलकाता, 16 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासनकाल के दौरान सरकारी पुस्तकालयों और सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए पुस्तकों की खरीद में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय को कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी पुस्तकालयों के लिए साहित्यिक या विषयवस्तु की दृष्टि से कमजोर गुणवत्ता वाली पुस्तकों की बड़े पैमाने पर खरीद की गई। आरोप है कि इनमें कई पुस्तकें तृणमूल नेताओं के रिश्तेदारों या करीबी लोगों द्वारा लिखी गई थीं या फिर ऐसे प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई थीं, जिन्हें तत्कालीन सत्तारूढ़ दल का संरक्षण प्राप्त था।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों की जानकारी जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा मंत्री गौरी शंकर घोष को दी है और मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारी ने बताया कि इस मामले को आवश्यकता पड़ने पर कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग को भी सौंपा जा सकता है, ताकि पूरे मामले की गहन जांच हो सके।

विभाग के अनुसार, जांच केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगी। यह भी देखा जाएगा कि क्या पसंदीदा लेखकों की एक ही किताबों को हर साल बड़ी संख्या में खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

अधिकारी ने यह भी बताया कि पुस्तकों के चयन के लिए किसी प्रभावी स्क्रीनिंग या गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया का अभाव था। किन पुस्तकों की खरीद होनी चाहिए और किनकी नहीं, इसके लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इन सभी पहलुओं की अब जांच की जाएगी।

हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे पर पिछली ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शायद ही कोई ऐसा विभाग बचा हो, जहां भ्रष्टाचार न हुआ हो।

उन्होंने कहा था कि वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद दिवंगत ज्योति बसु ने कहा था कि विकास के जिन क्षेत्रों में वे काम करना चाहते थे, उनमें से अधिकांश की शुरुआत पहले ही तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र राय कर चुके थे।

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, "लेकिन आज जब मैंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है, तो जिस भी विभाग को देखता हूं, वहां पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से छोड़ी गई अव्यवस्था और भ्रष्टाचार दिखाई देता है।"

--आईएएनएस

डीएससी