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प्रेस फ्रीडम ग्रुप ने पाकिस्तान में निर्वासित अफगान पत्रकारों के साथ ज्यादती पर जताई चिंता

पेरिस, 7 मार्च (आईएएनएस)। एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय प्रेस फ्रीडम संस्था ने पाकिस्तान में निर्वासित पत्रकारों समेत अफगान रिफ्यूजी को टारगेट करने की कार्रवाई पर चिंता जताई है। ग्रुप ने दुनिया का ध्यान इनके साथ हो रही ज्यादती की ओर आकर्षित कराया है।
 
प्रेस फ्रीडम ग्रुप ने पाकिस्तान में निर्वासित अफगान पत्रकारों के साथ ज्यादती पर जताई चिंता

पेरिस, 7 मार्च (आईएएनएस)। एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय प्रेस फ्रीडम संस्था ने पाकिस्तान में निर्वासित पत्रकारों समेत अफगान रिफ्यूजी को टारगेट करने की कार्रवाई पर चिंता जताई है। ग्रुप ने दुनिया का ध्यान इनके साथ हो रही ज्यादती की ओर आकर्षित कराया है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने दावा किया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती झड़पों को इस कार्रवाई के बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इस्लामाबाद ने 27 फरवरी को इसे "खुली जंग" घोषित किया था।

संगठन के मुताबिक, "पाकिस्तान में शरण लिए हुए अफगान पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा रहा है और देश से निकालने की धमकी दी जा रही है। दिक्कत ये है कि अगर वो वापस जाते हैं तो उनकी जान को और खतरा हो सकता है।"

आरएसएफ ने बताया कि दोनों देशों में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पिछले हफ्ते पाकिस्तान में कई अफगान पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है।

डिटेंशन सेंटर में रखे जाने के बारे में कहा गया है कि ये गिरफ्तारियां 2026 की शुरुआत से आरएसएफ द्वारा दर्ज की गई लगभग 20 गिरफ्तारियों में शामिल हैं।

पिछले 15 दिनों में आरएसएफ समर्थित करीब छह पत्रकारों को जबरदस्ती अफगानिस्तान वापस भेजा गया है। संस्थान के अनुसार इस तरह जनवरी से अब तक इनकी कुल संख्या नौ हो गई है।

इस बात पर जोर देते हुए कि कई मीडिया प्रोफेशनल्स ने अपनी चिंताएं शेयर की हैं, आरएसएफ ने एक जर्नलिस्ट के हवाले से कहा: "27 फरवरी से, पुलिस हमारे इलाके में अफगानों के खिलाफ बार-बार जांच अभियान चला रही है।"

आरएसएफ ने कहा कि कई और लोगों ने भी पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों की शिकायत की है। इसमें भ्रष्टाचार का एंगल भी है, जहां पकड़े गए लोगों को भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है।

आरएसएफ ने एक जर्नलिस्ट का साक्षात्कार लिया, जिसने बताया, "पाकिस्तानी पुलिस डिटेंशन सेंटर में पूरा दिन बिताने के बाद, मुझे डिपोर्टेशन से बचने और अपनी रिहाई पक्की करने के लिए 115,000 पीकेआर (लगभग 400 अमेरिकी डॉलर) देने के लिए मजबूर किया गया। अगले दिन, मेरे मकान मालिक ने मुझे जगह छोड़ने के लिए भी कह दिया था।"

आरएसएफ ने बताया कि ये सभी मीडिया प्रोफेशनल्स तालिबान शासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण अफगानिस्तान छोड़कर चले गए थे।

आरएसएफ दक्षिण एशिया डेस्क की हेड सेलिया मर्सियर ने कहा, "मौजूदा हालात को मनमानी गिरफ्तारी और किसी को निकालने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ये बदले की कार्रवाई इसलिए और भी मंजूर नहीं है क्योंकि ये उन मीडिया प्रोफेशनल्स को टारगेट करती है जो तालिबान से धमकी मिलने की वजह से अफगानिस्तान से भागे थे। उन्हें गिरफ्तार करके उनके देश वापस भेजना उन्हें खतरों में डालने जैसा है: जो गिरफ्तारी, हिंसा, और इससे भी बुरा हो सकता है।"

उन्होंने आगे कहा, "आरएसएफ पाकिस्तानी अधिकारियों से अपील करता है कि वे अफगान पत्रकारों को तुरंत गिरफ्तार करना और डिपोर्ट करना बंद करें, उनकी सुरक्षा की गारंटी दें और नॉन-रिफाउलमेंट (जबरन स्वदेश लौटाना) के सिद्धांत का सम्मान करें।"

आरएसएफ ने कहा कि तालिबान शासन के साथ तनाव के बैकग्राउंड में, 2023 में शुरू हुई पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा अफगान शरणार्थियों को निकालने की एक बड़ी नीति का हिस्सा है।

--आईएएनएस

केआर/