राष्ट्रपति मुर्मु ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार किया
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से एल. मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति सचिवालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी के अनुसार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 (2) के तहत राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा मंजूर किया है और यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
मुरुगन सूचना और प्रसारण तथा संसदीय मामलों के राज्य मंत्री (एमओएस) के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि उन्हें उनके मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाए और उन्हें अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की अनुमति दी जाए। ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि वे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय दे सकें।
प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में, मुरुगन ने कहा कि वे जमीनी स्तर की राजनीति में लौटना चाहते हैं और पूरे तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की हालिया तमिलनाडु यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता से मिले प्यार और उत्साह ने उनके इस विश्वास को और मजबूत कर दिया है कि भाजपा इस राज्य में और भी बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है। उन्होंने अगले संसदीय चुनावों के लिए पार्टी को तैयार करने में अपना समय और ऊर्जा लगाने का संकल्प लिया।
'एक्स' अकाउंट पर साझा किए गए पत्र में मुरुगन ने लिखा, "अब मैं जमीनी स्तर पर लौटना चाहता हूं, अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देना चाहता हूं।"
उन्होंने दोहराया कि यही वह मार्गदर्शक सिद्धांत है जिसने लगभग तीन दशकों तक एबीवीपी और भाजपा में उनके राजनीतिक सफर को दिशा दी है।
मुरुगन ने कहा कि उनकी योजना हर गांव और हर गली में जाने, लोगों से मिलने और पूरे राज्य में पार्टी की पहुंच बढ़ाने में मदद करने की है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 'समावेशी विकास' के संदेश को हर व्यक्ति तक पहुंचाने और परिवारों को एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की इच्छा जताई।
केंद्र सरकार में अपनी सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताते हुए मुरुगन ने अपने उन शुरुआती दिनों को याद किया जब वे दिहाड़ी मजदूरों के बेटे के रूप में पले-बढ़े थे। उन्होंने बताया, "उनके माता-पिता पशु चराने का काम भी करते थे और आज भी कोनूर गांव में एक सादा जीवन जी रहे हैं।"
--आईएएनएस
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