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पोस्को और जेएसडब्ल्यू स्टील ने भारत में स्टील प्लांट लगाने के लिए किए 7.3 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया की कंपनी पोस्को ग्रुप ने सोमवार को घोषणा की कि उसने भारत की जेएसडब्ल्यू स्टील के साथ मिलकर 10.7 ट्रिलियन वॉन (करीब 7.3 अरब डॉलर) का निवेश कर भारत में एक बड़ा स्टील प्लांट लगाने के लिए अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
 
पोस्को और जेएसडब्ल्यू स्टील ने भारत में स्टील प्लांट लगाने के लिए किए 7.3 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया की कंपनी पोस्को ग्रुप ने सोमवार को घोषणा की कि उसने भारत की जेएसडब्ल्यू स्टील के साथ मिलकर 10.7 ट्रिलियन वॉन (करीब 7.3 अरब डॉलर) का निवेश कर भारत में एक बड़ा स्टील प्लांट लगाने के लिए अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह निवेश पोस्को की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह भारत को दक्षिण एशिया में अपना प्रोडक्शन हब बनाना चाहता है और अपने वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है।

दोनों कंपनियों के बीच यह जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट भारत में साइन किया गया, जिसमें पोस्को ग्रुप के चेयरमैन चांग इन-ह्वा और जेएसडब्ल्यू स्टील के सीईओ जयंत आचार्य शामिल हुए।

इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां इस प्रोजेक्ट में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगी और एक इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट बनाएंगी, जिसमें एक ही जगह पर पूरा उत्पादन प्रोसेस होगा।

पोस्को इस प्रोजेक्ट में करीब 5.3 ट्रिलियन वॉन का निवेश करेगी। यह प्लांट भारत के ओडिशा राज्य में बनाया जाएगा, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 6 मिलियन टन होगी और इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इससे पहले, दोनों कंपनियों ने 2024 में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) और पिछले साल एक प्रारंभिक एग्रीमेंट भी साइन किया था।

पोस्को के सीईओ ली ही-ग्युन ने कहा कि इस संयुक्त निवेश के जरिए पोस्को की आधुनिक स्टील तकनीक और जेएसडब्ल्यू ग्रुप की स्थानीय मजबूती को जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य में नई वैल्यू बनेगी और दोनों देशों के औद्योगिक विकास और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

इस बीच, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिडिल ईस्ट संकट के बीच ऊर्जा सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद राष्ट्रपति ली ने बताया कि दोनों देशों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), फाइनेंस और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट की स्थिति को देखते हुए दोनों देश ऊर्जा संसाधनों और जरूरी कच्चे माल की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए सहयोग को और मजबूत करेंगे।

--आईएएनएस

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