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आंध्र प्रदेश में टीडीपी पर चुनाव में धांधली का आरोप, पुलिस और चुनाव अधिकारियों से मिलीभगत का दावा

ताडेपल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद मडिला गुरुमूर्ति और पूर्व मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने रविवार को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को फायदा पहुंचाने के लिए पुलिस और चुनाव अधिकारी उसके नेताओं के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।
 

ताडेपल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद मडिला गुरुमूर्ति और पूर्व मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने रविवार को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को फायदा पहुंचाने के लिए पुलिस और चुनाव अधिकारी उसके नेताओं के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।

सांसद गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि राज्य में चुनावी माफिया और बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन का मामला सामने आ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि टीडीपी के प्रत्येक उम्मीदवार से निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने के बदले 40 से 50 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार में चुनाव प्रक्रिया को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है।

गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि इस कथित मिलीभगत के तहत टीडीपी नेताओं ने वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका, उन्हें धमकाया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि रिटर्निंग अधिकारियों के कक्षों के अंदर भी नामांकन पत्र फाड़े गए। वाईएसआरसीपी सांसद के मुताबिक, पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जबकि चुनाव अधिकारियों ने मामूली तकनीकी आधारों और कथित तौर पर मनमाने तरीके से जांच प्रक्रिया अपनाकर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए।

उन्होंने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी प्रतिस्पर्धा खत्म करना और टीडीपी उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत सुनिश्चित करना है। गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि प्रत्येक उम्मीदवार से कथित तौर पर वसूली गई 40 से 50 लाख रुपये की राशि उन लोगों के बीच बांटी गई, जिन्होंने इन नतीजों को सुनिश्चित करने में मदद की। इनमें पुलिसकर्मी और चुनाव अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।

तिरुपति से लोकसभा सांसद गुरुमूर्ति ने कहा कि यह केवल चुनाव से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, वे ही कथित तौर पर इस गतिविधि का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से चुनावों के दौरान हुई कथित हिंसा, हेरफेर और भ्रष्टाचार पर जवाब देने की मांग की। साथ ही, राज्य निर्वाचन आयोग से पैसों के लेन-देन, विवादित नामांकनों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की।

वाईएसआरसीपी के पूर्व मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने भी आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव कथित चुनावी माफिया और बड़े पैमाने पर धन उगाही के मामले में बदल गए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीडीपी नेता, पुलिसकर्मी और चुनाव अधिकारी एक संगठित गठजोड़ के तहत काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, टीडीपी उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने के बदले प्रत्येक उम्मीदवार से 40 से 50 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं।

अमरनाथ ने आरोप लगाया कि इस कथित भ्रष्टाचार के तहत धनराशि पुलिसकर्मियों, चुनाव अधिकारियों और परिणामों को प्रभावित करने में मदद करने वाले अन्य लोगों के बीच बांटी जा रही है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के सामने चुनावी मुकाबले का सामना करने के बजाय टीडीपी उम्मीदवार कथित तौर पर धमकी, हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी प्रक्रिया के जरिए निर्विरोध जीत हासिल कर रहे हैं।

पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को अपने शासन में पुलिस और चुनावी तंत्र पर लगे इन गंभीर आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या यही मुख्यमंत्री का लोकतंत्र का मॉडल है, जहां विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जाता है और निर्विरोध जीत राजनीतिक नेताओं तथा अधिकारियों के कथित गठजोड़ के लिए कमाई का जरिया बन जाती है। हालांकि, ये आरोप वाईएसआरसीपी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

--आईएएनएस

डीएससी