पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु में शराब की दुकानें बंद करने की मांग की
चेन्नई, 30 सितंबर (आईएएनएस)। पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से तीन साल के भीतर शराब की सभी दुकानें बंद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शराब पीने से होने वाला नुकसान, इसकी बिक्री से होने वाली कमाई से कहीं अधिक है। इसके साथ ही हाल ही में हुई हत्याओं को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
रामदास ने शराब की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के कार्यक्रम के तहत हर साल 1,000 दुकानें बंद करने का प्रस्ताव रखा। उनकी मांग का मुख्य आधार शराब की लत से होने वाला भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान है, खासकर लोगों की मौत में इसकी भूमिका बढ़ती जा रही है।
अपने बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले साल तमिलनाडु में महिलाओं की तुलना में 1.10 लाख ज्यादा पुरुषों की मौत हुई। उन्होंने इस अंतर का बड़ा कारण शराब के सेवन से जुड़ी समस्याओं को बताया। हालांकि बयान में इन आंकड़ों के स्रोत या मौतों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया था।
रामदास के अनुसार, शराब की लत से दिल की बीमारियों और किडनी फेल होने के अलावा दुर्घटनाएं और आत्महत्याएं भी होती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि शराब की बिक्री के कुल असर का आकलन करते समय केवल सरकारी खजाने में आने वाले पैसे पर ध्यान देने के बजाय, इन परिणामों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
रामदास ने दावा किया कि सरकार को शराब के कारोबार से हर साल 60,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। हालांकि, शराब पीने से होने वाला नुकसान उससे मिलने वाले रेवेन्यू से कहीं अधिक है, इसलिए शराब की दुकानों को धीरे-धीरे बंद करना जरूरी है।
इस बयान में सभी दुकानों को तीन साल के अंदर बंद करने की मांग की गई और हर साल 1,000 दुकानें बंद करने का लक्ष्य तय किया गया। इसमें यह नहीं बताया गया कि उस सालाना लक्ष्य से तय समय में दुकानों को पूरी तरह कैसे बंद किया जाएगा।
इसके अलावा, रामदास ने तमिलनाडु में हाल ही में हुई हत्याओं की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने तिरुनेलवेली में दो लोगों की हत्या और चेन्नई में एक युवक की उसके परिजनों के सामने हत्या का जिक्र किया। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति किस दिशा में जा रही है, इस पर कड़ा सवाल उठाया।
हालांकि रामदास ने शराब की दुकानें बंद करने की अपनी मांग में शराब को मौत के कई कारणों से जोड़ा लेकिन कानून-व्यवस्था पर अपनी अलग आलोचना में जिन खास हत्याओं का जिक्र किया, उनमें शराब का कोई संबंध नहीं बताया।
--आईएएनएस
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