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पटना में लोक भवन की ओर मार्च कर रहे पीएचडी धारकों और शोधार्थियों को पुलिस ने रोक दिया

पटना, 22 अगस्त (आईएएनएस)। पटना में पिछले 18 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे पीएचडी धारक और शोधार्थी शनिवार को अपनी मांगों को लेकर लोक भवन की ओर मार्च करने लगे।
 

पटना, 22 अगस्त (आईएएनएस)। पटना में पिछले 18 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे पीएचडी धारक और शोधार्थी शनिवार को अपनी मांगों को लेकर लोक भवन की ओर मार्च करने लगे।

तिरंगा लिए प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्थल से आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पटना के आर ब्लॉक क्षेत्र के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

बिहार के सभी पीएचडी धारकों और शोधार्थी संघ के सदस्य पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें उच्च शिक्षा, योग्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और शोधार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

पुलिसकर्मियों को पहले से ही तैनात कर दिया गया था और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा दिए गए थे।

जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया तो पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें लोक भवन की ओर बढ़ने से रोक दिया।

एसोसिएशन के संयोजक कुमुद पटेल ने कहा कि यह आंदोलन सीमित संख्या में पदों पर भर्ती की मांग से कहीं अधिक व्यापक है।

उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी बिहार की उच्च शिक्षा प्रणाली, रोजगार के अवसरों और शोधकर्ताओं के अधिकारों और गरिमा से संबंधित व्यापक सुधारों की मांग कर रहे हैं।

पटेल ने कहा कि यह संघर्ष बिहार में उच्च शिक्षा की भविष्य की दिशा तय करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करने के बारे में है।

उन्होंने शिक्षा, रोजगार और न्याय का समर्थन करने वाले लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें न केवल नियुक्तियों से संबंधित हैं, बल्कि व्यापक शैक्षणिक वातावरण और राज्य में हजारों शोधकर्ताओं और उच्च योग्य युवाओं के भविष्य की संभावनाओं से भी संबंधित हैं।

बिहार में विरोध प्रदर्शन कर रहे पीएचडी धारकों और शोधार्थियों ने सहायक प्रोफेसरों की भर्ती और सेवा शर्तों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के व्यापक कामकाज से संबंधित कई मांगों को रेखांकित किया है।

प्रदर्शनकारियों ने सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी विनियम, 2018 के साथ-साथ तालिका 3ए को लागू करने की मांग की।

सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के लिए आयु सीमा को 43 से बढ़ाकर 55 वर्ष करना, दीर्घकालिक अतिथि संकाय के सेवा एकीकरण और नियमितीकरण के लिए एक निष्पक्ष नीति तैयार करना, बिहार में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के लिए एक स्पष्ट और कानूनी रूप से मान्य अधिवास नीति लागू करना, राज्य भर के विश्वविद्यालयों में स्थायी सहायक प्रोफेसर पदों पर नियमित और समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करना और विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की शैक्षणिक स्वायत्तता की रक्षा करना।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भर्ती प्रणाली में सुधार लाने, योग्य शोधकर्ताओं को अधिक अवसर प्रदान करने और बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ये उपाय आवश्यक हैं।

उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी