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तमिलनाडु के कोयंबटूर में नारियल के बागानों में कीट का प्रकोप, किसानों ने सरकार से मांगी मदद

कोयंबटूर, 14 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सुलूर तालुक के उत्तरी हिस्सों में नारियल उत्पादकों के लिए ब्लैक-हेडेड कैटरपिलर का गंभीर प्रकोप बड़ी चिंता का कारण बन गया है। इस विनाशकारी कीट ने कई गांवों में नारियल के बागानों को नुकसान पहुंचाया है और उत्पादन पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
 

कोयंबटूर, 14 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सुलूर तालुक के उत्तरी हिस्सों में नारियल उत्पादकों के लिए ब्लैक-हेडेड कैटरपिलर का गंभीर प्रकोप बड़ी चिंता का कारण बन गया है। इस विनाशकारी कीट ने कई गांवों में नारियल के बागानों को नुकसान पहुंचाया है और उत्पादन पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

किसानों ने बागवानी विभाग से आग्रह किया है कि वह इस कीट पर नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए, क्योंकि इसका प्रकोप लगातार फैलता जा रहा है।

इस कीट का प्रकोप सबसे पहले मोप्पेरिपालयम गांव में दर्ज किया गया, जहां किसानों ने बताया कि बड़ी संख्या में नारियल के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि उत्तर और पूर्वी दिशा से चलने वाली हवाओं के कारण यह कीट अब पड़ोसी गांवों कडुवेट्टिपालयम, किट्टमपालयम और पडुवमपल्ली तक भी फैल रहा है।

ब्लैक-हेडेड कैटरपिलर नारियल के पेड़ों को नुकसान पहुंचा रहे है। इसके लार्वा पत्तियों की निचली सतह पर मौजूद हरे क्लोरोफिल ऊतक को खुरचकर खाते हैं, जिससे पेड़ की प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।

जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, प्रभावित पत्तियां सूखने लगती हैं, नई पत्तियों का विकास कम हो जाता है और नारियल का उत्पादन काफी घट जाता है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित गांवों के किसानों ने बताया कि उन्होंने पेड़ों की सूखी और बदरंग पत्तियां, पत्तियों के नीचे कीटों का मल तथा रेशमी जाले जैसी संरचनाएं देखी हैं, जो व्यापक संक्रमण का संकेत हैं।

किसानों ने बागवानी विभाग से अपील की है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करे, ताकि यह कीट और अधिक क्षेत्रों में फैलने से पहले उस पर नियंत्रण पाया जा सके और नारियल के बागानों को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके।

बागवानी विभाग के अधिकारियों ने किसानों को इस प्रकोप से निपटने के लिए समेकित कीट प्रबंधन (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट) अपनाने की सलाह दी है। अधिकारियों ने गंभीर रूप से संक्रमित पत्तियों की छंटाई कर उन्हें जलाने की सिफारिश की है, ताकि लार्वा और प्यूपा नष्ट हो जाएं और कीट की संख्या बढ़ने से रोकी जा सके।

अधिकारियों ने जैविक नियंत्रण के तहत परजीवी ततैयों, विशेष रूप से ब्रैकॉन प्रजाति की ततैयों को छोड़ने की भी सलाह दी है। ये प्राकृतिक रूप से ब्लैक-हेडेड कैटरपिलर पर हमला करती हैं और उनकी संख्या नियंत्रित करने में प्रभावी मानी जाती हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा हवा की दिशा को देखते हुए इन परजीवी ततैयों को बागानों के पश्चिमी हिस्से से दिन के ठंडे समय में छोड़ा जाना चाहिए, ताकि उनका प्रभाव अधिकतम हो सके।

नियंत्रण उपायों के तहत किसानों को प्रत्येक एकड़ में शाम 7 बजे से रात 11 बजे के बीच एक लाइट ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है। इससे वयस्क पतंगें आकर्षित होकर नष्ट हो जाएंगी और अंडे देने से पहले ही उनका नियंत्रण किया जा सकेगा।

रासायनिक नियंत्रण केवल गंभीर संक्रमण की स्थिति में अपनाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने पत्तियों के नीचे बने रेशमी जालों पर निर्धारित मात्रा में डाइक्लोरवॉस या मैलाथियॉन, क्विनालफॉस अथवा फॉस्फामिडॉन युक्त स्वीकृत कीटनाशकों का लक्षित छिड़काव करने की सिफारिश की है।

एहतियात के तौर पर प्रभावित गांवों से तीन किलोमीटर के दायरे में स्थित नारियल के बागानों के किसानों को भी परजीवी ततैयों का पहले से ही छोड़ने की सलाह दी गई है, ताकि इस कीट के संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम