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तमिलनाडु में किसान समिति ने की नहरों की गाद निकालने के लिए वार्षिक आवंटन की मांग

कोयंबटूर, 26 मई (आईएएनएस)। परंबिकुलम-अलियार सिंचाई परियोजना की थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने तमिलनाडु सरकार से नहरों की गाद सफाई (डिसिल्टिंग) के कार्यों के लिए प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की है। समिति का कहना है कि यह कदम कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों के अंतिम छोर तक स्थित कृषि क्षेत्रों में पानी के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
 
तमिलनाडु में किसान समिति ने की नहरों की गाद निकालने के लिए वार्षिक आवंटन की मांग

कोयंबटूर, 26 मई (आईएएनएस)। परंबिकुलम-अलियार सिंचाई परियोजना की थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने तमिलनाडु सरकार से नहरों की गाद सफाई (डिसिल्टिंग) के कार्यों के लिए प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की है। समिति का कहना है कि यह कदम कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों के अंतिम छोर तक स्थित कृषि क्षेत्रों में पानी के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

समिति ने जल संसाधन विभाग के मंत्री एन. आनंद और वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन को ज्ञापन सौंपकर सिंचाई नहरों में बढ़ती गाद और उससे जल प्रवाह में आ रही बाधाओं के कारण किसानों के सामने उत्पन्न हो रही समस्याओं को उजागर किया है।

समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सिंचाई नेटवर्क लगभग 4.25 लाख एकड़ के विशाल कृषि क्षेत्र को सेवा प्रदान करता है। इसमें से लगभग 3.77 लाख एकड़ क्षेत्र थिरुमूर्ति बांध सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत आता है, जबकि करीब 44,000 एकड़ क्षेत्र को अलियार बांध नेटवर्क के माध्यम से सिंचित किया जाता है।

यह परियोजना पश्चिमी तमिलनाडु में कृषि को सहारा देने वाली प्रमुख सिंचाई प्रणालियों में से एक बनी हुई है। समिति ने बताया कि क्षेत्र में सिंचाई गतिविधियों का संचालन जल संसाधन विभाग द्वारा बनाए रखे गए नहर नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है, जिसमें थिरुमूर्ति बेसिन की 134 किसान संघों और अलियार बेसिन की 16 किसान संघों की भागीदारी है।

समिति ने यह भी बताया कि वर्ष 2016 से 2021 के बीच राज्य सरकार ने नहरों की गाद सफाई के कार्यों के लिए प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे, जिससे सिंचाई नेटवर्क में जल प्रवाह निर्बाध बना रहा। हालांकि, 2021 से 2025 के दौरान कोई आवंटन नहीं किया गया, जिसके कारण कई नहरों में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई।

समिति के अनुसार, रखरखाव की कमी से जल वितरण पर गंभीर प्रभाव पड़ा, विशेष रूप से अंतिम छोर वाले क्षेत्रों में, जहां किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल प्राप्त करने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समिति ने कहा कि पिछले वर्ष दिए गए ज्ञापनों के बाद पूर्व सरकार ने 10 करोड़ रुपये मंजूर कर धनराशि जारी की थी, जिससे गाद सफाई का कार्य कराया जा सका। अब समिति ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी इसी आवंटन को जारी रखने का अनुरोध किया है ताकि सिंचाई संबंधी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नहरों की सफाई कराने में सीमाएं हैं, क्योंकि इस योजना के अंतर्गत किसी विशेष नहर पर केवल तीन वर्षों में एक बार ही कार्य की अनुमति है, जो नियमित रखरखाव की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त नहीं है।

एक अलग ज्ञापन मुख्यमंत्री विजय, जल संसाधन मंत्री, वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित किया गया है। समिति ने प्रणाली के अंतर्गत लंबे समय से लंबित परियोजनाओं जिनमें अनैमलैयारु और नल्लारु परियोजनाओं को पूरा करने की भी मांग की।

--आईएएनएस

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