पंचायती राज संस्थाएं राजीव गांधी की देन: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' मनाया। इस अवसर पर पार्टी नेताओं ने राजीव गांधी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकारों द्वारा गांव में जमीनी स्तर के लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए कुछ ऐतिहासिक कानूनों को याद किया।
1993 में आज ही के दिन संविधान के 73वें संशोधन का राजीव गांधी को श्रेय देते हुए कांग्रेस सांसद और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा, "यह वास्तव में एक परिवर्तनकारी पहल थी, जो पूरी तरह से राजीव गांधी के आग्रह और दृढ़ता का परिणाम थी।"
उन्होंने कहा कि यह उन्हीं की बदौलत संभव हो पाया कि पंचायती राज संस्थाओं में चुनी गई सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों, जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से संबंधित महिलाएं भी शामिल हैं।
जयराम रमेश ने आगे कहा, "यह पूरी तरह से उनका योगदान था कि आज पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें से लगभग 15 लाख महिलाएं हैं। यह संशोधन (64वां) मूल रूप से 1989 के मध्य में पेश किया गया था, लेकिन लोकसभा में पारित होने के बाद, भाजपा के विरोध के कारण यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका।"
पंचायती राज संस्थाओं को बढ़ावा देने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, "यह डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ही थी जिसने मई 2004 में पंचायती राज मंत्रालय का गठन किया और फरवरी 2006 में ऐतिहासिक मनरेगा की शुरुआत की, जिसने ग्राम पंचायतों को योजना बनाने और उसे लागू करने में एक अहम भूमिका सौंपी।"
जयराम रमेश ने कहा कि राजीव गांधी सरकार द्वारा लाया गया 73वां संशोधन, संविधान में अनुच्छेद 243-ए से 243-ओ तक अत्यंत विस्तृत प्रावधान लेकर आया, जिसका उद्देश्य पंचायतों को व्यापक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें हमारी राजव्यवस्था की नींव बनाना था। आज लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषदें हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक की हालिया हार की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए रमेश ने कहा, "पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाना, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से कहीं अधिक जरूरी है।
--आईएएनएस
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